Thursday, September 27, 2018

अडल्ट्री अब अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया 158 साल पुराना क़ानून

सुप्रीम कोर्ट ने अडल्ट्री यानी व्याभिचार को अपराध बताने वाले क़ानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया है.
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खनविलकर, जस्टिस आरएफ़ नरीमन, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में कहा कि व्याभिचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 497 संविधान के ख़िलाफ़ है.
मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस खनविलकर ने कहा,"हम आईपीसी की धारा 497 और आपराधिक दंड संहिता की धारा 198 को असंवैधनिक क़रार देते हैं."
जस्टिस नरीमन ने कहा कि ये क़ानून समानता के अधिकार और महिलाओं को एकसमान अधिकारों के प्रावधान का उल्लंघन है.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं है.
इसके साथ ही कोर्ट ने 1860 में बने इस 158 साल पुराने क़ानून को असंवैधानिक करार दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि ये क़ानून मनमाना है और समानता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है.
इटली में रहने वाले एनआरआई जोसेफ़ शाइन ने दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. उनकी अपील थी कि आईपीसी की धारा 497 के तहत बने अडल्ट्री क़ानून में पुरुष और महिला दोनों को ही बराबर सज़ा दी जानी चाहिए.
इस याचिका के जवाब में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ऐसा करने के लिए अडल्ट्री क़ानून में बदलाव करने पर क़ानून हल्का हो जाएगा और समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा. जानकार मानते हैं कि इस फ़ैसले का असर कई और मामलों पर भी पड़ सकता है.
1860 में बना अडल्ट्री क़ानून लगभग 158 साल पुराना था. इसके तहत अगर कोई पुरुष किसी दूसरी शादीशुदा औरत के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है, तो महिला के पति की शिकायत पर पुरुष को अडल्ट्री क़ानून के तहत गुनहगार माना जाता था.
ऐसा करने पर पुरुष को पांच साल की क़ैद और जुर्माना या फिर दोनों ही सज़ा का प्रवाधान था.
संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में खेले जा रहे एशिया कप में बांग्लादेश ने सुपर-4 के मुक़ाबले में पाकिस्तान को हराकर फ़ाइनल में धमाकेदार एंट्री ली है.
अबू धाबी में खेले गए इस मुक़ाबले में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 37 रन से हरा दिया. बांग्लादेश ने मुशफिकर ( ) और मिथुन (
तो क्या तकरीबन डेढ़ साल पहले वनडे टीम की कमान संभालने वाले सरफ़राज़ अहमद संकेत दे रहे हैं कि वो कप्तानी छोड़ने जा रहे हैं.
) की बेहतरीन पारियों और दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 144 रन की साझेदारी के दम पर 48.5 ओवरों में 239 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान की टीम निर्धारित 50 ओवरों में नौ विकेट पर 202 रन ही बना सकी.
इसके साथ ही पाकिस्तान के टूर्नामेंट के फ़ाइनल में पहुँचाने के सपने भी बिखर गए और बांग्लादेश की टीम तीसरी बार एशिया कप के फ़ाइनल में पहुँचने में कामयाब रही. फ़ाइनल में बांग्लादेश के सामना भारत से होगा.
टूर्नामेंट में पाकिस्तान का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. भारत से पाकिस्तान की टीम अपने दोनों मुक़ाबले हारी और अफ़ग़ानिस्तान को बामुश्किल हरा सकी.
पाकिस्तान की टीम हार से मायूस नज़र आई और इसके कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने इस बात को माना भी. सरफ़राज़ ने कहा, "अच्छा नहीं लग रहा है. हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं था. बतौर कप्तान मैंने भी अच्छा नहीं किया, मैंने टीम को ठीक से लीड नहीं किया."र्नामेंट में सरफ़राज़ के बतौर कप्तान लिए गए फ़ैसलों पर काफ़ी चर्चा हुई. बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में भी जब टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेल रहे जुनैद ख़ान ने बांग्लादेश को चार ओवरों में दो झटके दिए तो सरफ़राज़ ने उन्हें गेंदबाज़ी आक्रमण से हटा दिया.
इसके बाद बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों मुशफिकर और मिथुन ने विकेट पर लंगर डाल दिया और दोनों ने 144 रनों की साझेदारी कर दी.
आकाश चोपड़ा ने ट्वीट किया, "सरफ़राज़ ने मैच को मुड़ जाने दिया....चैंपियंस ट्रॉफी में सफलता के बाद उन्हें बहुत ज़्यादा आंका था. एशिया कप में वो इसका अंश भर ही नज़र आए."
सरफ़राज़ को पिछले साल फ़रवरी में अज़हर अली की जगह पाकिस्तान की वनडे टीम की कप्तानी सौंपी गई थी. 2015 के वर्ल्ड कप में क्वार्टर फ़ाइनल में शिकस्त के बाद मिस्बाह उल हक़ ने अचानक वनडे से संन्यान लेने का ऐलान कर दिया था और इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अज़हर अली को कप्तान नियुक्त किया था.
इसके बाद सरफ़राज़ ने इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफ़ी में टीम का नेतृत्व करते हुए फ़ाइनल में भारत को शिकस्त दी थी और अपनी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता का सबूत दिया था.
ख़ैर, बात एशिया कप में पाकिस्तान के प्रदर्शन की करें तो पूरे टूर्नामेंट में उसके बल्लेबाज़ रनों के लिए जूझते रहे.
विकेट पर अच्छी तरह जमने के बाद बल्लेबाज़ों ने जिस तरह अपने विकेट फेंके उससे निश्चित तौर पर टीम प्रबंधन परेशान होगा. अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ मुकाबले को ही लें, बाबर आज़म और इमाम उल हक़ ने हाफ़ सेंचुरियां बनाईं और फिर आउट हो गए. ख़ास बात ये रही कि दोनों ने धीमी बल्लेबाज़ी की. पाकिस्तान टीम में इकलौते शोएब मलिक ही रहे जिन्होंने अपनी बल्लेबाज़ी में निरंतरता दिखाई.

Monday, September 17, 2018

在野火肆虐的加州,水管理机制成为焦点

月末燃起的“门多西诺复合大火”是加州历史上最大的一场野火,过火面积30万英亩,其中大多数是林地。加州面临的问题是如此规模的大火并非个例。

加州20起最大的野火中有15起是本世纪发生的。并且,该州记录上最具破坏性的大火中有6起发生在过去十个月内。

气候变化使火情更加恶化,让应对更加棘手。与此同时,特朗普政府继续采取狭隘商业利益优先的土地管理方式,但未采取任何火灾防控措施,对气候风险视而不见。

这些大火让加州全境水资源短缺这样一个长期存在的环境危机成为关注的焦点。围绕(深受气候变化影响的)供水管理的讨论如火如荼,因为这与加州居民和企业的未来前景息息相关。

1970年以来,美国西部的温度上升幅度是全球平均的2倍。今年7月是加州有记录以来最热的一个月份。据加州大学洛杉矶分校气候科学家丹尼尔·斯万说,加州近来一半的野火要归因于气候变化引起的极热天气。

斯万说:“供野火肆虐的林地……前所未有的干燥,去年冬天的低降水量、今夏的极度高温、再加上长期干旱的影响,共同造成了这一结果。”

根本原因

加州人口和经济的增长再加上糟糕的规划工作,使更多人和建筑面临风险。野火活跃度的增加意味着加州和其他州用于灭火的支出增加了,而留给防火的钱则减少了。

克林顿和奥巴马政府期间担任美国内政部副部长的大卫·海斯说:“如果你否认变化的复杂性和影响的显著性,你就不会拿出足够的资源对其作出反应。”

特朗普政府对于野火与气候变化之间的联系轻描淡写,这毫不奇怪。

现任内政部长莱恩·辛克一开始就否认二者的联系,然后接着说:“很清楚,夏季变长了,干旱更干、温度更高。毫无争议的是,已死和将死的树木成了大规模野火的驱动力……这就是各种不利因素共同导致的一场‘完美风暴’,无论你是否相信气候变化,都不会减轻政府林业主管部门的责任。”

对于辛克和特朗普政府的其他成员来说,气候变化的明显迹象给他们的工作平添了麻烦,因为他们要放宽环境法规来开创新的商机,而且通常是在之前受到保护的联邦土地上。

辛克将他的批评者们称为“环境恐怖主义”,这些人反对他“工业优先”的森林管理方式,很多人认为这种方式是对采伐者的救济。

特朗普用怪癖的风格对野火作出回应,抱怨稀缺的水资源用错了地方,建议应该把水“优先用于扑灭野火,而非保护濒危物种”。

但与其他用途相比,防火所需的水是微不足道的。加州消防员们已经说了有足够的水来灭火。

水归谁手

不过,特朗普总统的发言无意中引起了人们对加州和美国西部另一项危机的关注,气候变化让这个危机更加严重,一触即发:谁在使用稀缺的水资源,用来做什么?

气候变化使加州的水危机更加严峻,导致干旱期更长,同时使内华达山脉的积雪减少,而加州四分之三以上的淡水都来自内华达山脉的积雪。科学家们也预测该地区的“降水摆动”事件将会增加。“降水摆动”是指气候在极湿和极干之间快速转变,从而使水资源配置更加困难,基础设施遭到破坏。

在水短缺的时候,围绕资源的政治斗争就会加剧。美国西部的水政治臭名昭著,历史上各种调水的大计划层出不穷。

洛杉矶的成功和发展要归因于通过一条数百英里长的欧文斯河引水渠。这项调水工程(有的人称之为“偷水”)的水权是通过可疑的方式和欧文斯河谷的破产农民获得的。

特朗普总统似乎对加州中央河谷的工业化农民很是同情。他们想要占有更多的水资源,而这里的一些水被拦在河中以保护三角洲胡瓜鱼和国王鲑等濒危物种。

这些农民在政治上很有影响力,水对他们来说很珍贵。与其他州相比,加州粮食产值更高。这里种植了美国三分之一的蔬菜和三分之二的水果和坚果,包括扁桃仁等“渴水”作物。

加州的火与水危机都很难解决。它们要求将公众的需要纳入稀缺资源的管理办法,而非只考虑特殊利益。这意味着水资源的管理和定价决策非常艰难,可能会伤害到某些集团,要么是强迫农民改变作物品种,要么强迫公众为他们的用水增加付费。

但显而易见,任何不考虑气候变化影响的方法终将失败。本周浓烟继续笼罩着美国西部,而在一些地区,朝阳都在浓烟映衬之下变得血红。

并非只有迷信的人会认为这可能预示着会发生更糟的事情。毕竟,美国西部正在燃烧,而水正在枯竭。

Monday, September 3, 2018

यूपी में बाढ़-बारिश से हाहाकार, 16 की मौत, वायु सेना ने 6 लोगों को हेलिकॉप्टर से बचाया

यूपी में भी बाढ़ ने कई जिलों में तबाही ला दी है. उत्तर प्रदेश के झांसी और ललितपुर में रविवार को अचानक आई बाढ़ में फंसे लोगों को वायु सेना की मदद से बाहर निकाला गया. प्रदेश के राहत आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि ललितपुर की तालबेहट तहसील में स्थित एक गांव अचानक भारी बारिश के कारण बाढ़ के पानी से घिर गया और वहां के छह निवासी फंस गए थे. वायु सेना की
कुमार ने बताया कि झांसी जिले की गरौठा तहसील में बेतवा नदी पर बने एरच बांध के नजदीक एक टापूनुमा जगह पर फंसे आठ मछुआरों को भी वायु सेना की मदद से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.
बारिश हुई जानलेवा
वहीं इसी बीच, प्रदेश में जानलेवा बनी बारिश की वजह से पिछले 24 घंटे के दौरान 16 लोगों की मौत हो गई तथा 12 अन्य जख्मी हो गए हैं. राहत आयुक्त कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान वज्रपात तथा बारिश के कारण मकान गिरने इत्यादि वर्षाजनित हादसों में कुल 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हो गई.
इसके अलावा सीतापुर में तीन, अमेठी तथा औरैया में दो-दो और लखीमपुर खीरी, रायबरेली एवं उन्नाव में एक-एक व्यक्ति की वर्षाजनित दुर्घटनाओं में मौत हुई है.  पूरे प्रदेश में ऐसे हादसों में 12 लोग जख्मी भी हुए हैं. इसके अलावा कुल 461 मकान अथवा झोपड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं.  शाहजहांपुर से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक जिले के कांठ क्षेत्र में खराब मौसम के बीच बिजली गिरने की घटनाओं में चार बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई तथा चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए.
आकाशीय बिजली का कहर
कांठ थाना क्षेत्र के शमशेरपुर गांव में कल शाम कुछ लड़के खेतों में पशु चरा रहे थे. इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई जिस से बचने के लिए वे बच्चे एक पेड़ के नीचे बैठ गए. इसी दौरान उस पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई. इस घटना में 24 वर्षीय मोहित नामक युवक के अलावा बबलू (05), अनमोल (10) तथा डबलू (11) की मौत हो गई है जबकि विपिन, रामकिशोर तथा एक अन्य लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया. इसी थाना क्षेत्र के नबीपुर गांव में खेतों में बकरी चरा रही 11 वर्षीय वंदना एवं सिकंदरपुर गांव में अशोक (42) को भी खराब मौसम के बीच गिरी बिजली ने चपेट में ले लिया जिससे उनकी भी घटनास्थल पर मौत हो गई.
जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने बताया कि उप जिलाधिकारी रामजी मिश्रा को घटनास्थल पर भेजा गया है साथ ही प्रत्येक मृतकों के परिजन को 12 घंटे के अंदर चार लाख रूपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है. मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अनेक इलाकों में बारिश हुई. अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में वर्षा होने का अनुमान है. असम में बारिश और बाढ़ का कहर जारी है.
टीम ने उन्हें सफलतापूर्वक बाहर निकाला.
इस बीच, केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जलभरण क्षेत्रों में व्यापक वर्षा की वजह से प्रदेश में गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा समेत अनेक नदियां उफान पर हैं. गंगा नदी नरौरा, अंकिनघाट और फर्रुखाबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. वहीं, कानपुर, गुमटिया, बलिया तथा डलमऊ में इसका जलस्तर लाल निशान के नजदीक बना हुआ है। रामगंगा नदी डाबरी में खतरे के चिह्न को पार गयी है, जबकि मुरादाबाद में यह इस निशान के करीब पहुंच चुकी है.
घाघरा नदी एल्गिनब्रिज, तुर्तीपार और अयोध्या में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. शारदा नदी का जलस्तर पलियाकलां में लाल चिह्न के पार बना हुआ है. वहीं शारदानगर में यह इस निशान के करीब पहुंच चुकी है. क्वानो नदी चंद्रदीपघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.
भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामलों में वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी वामपंथी विचारकों के ठिकाने पर हुई छापेमारी का विरोध किया. अब केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने उनपर पलटवार किया है.
रिजिजू ने बुधवार को ट्वीट किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माओवादियों को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था. लेकिन अब कांग्रेस अध्यक्ष खुले तौर पर माओवादियों के समर्थकों का समर्थन कर रहे हैं. देश की सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए
बता दें कि अक्टूबर, 2009 में बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब कुछ ऐसा ही बयान दिया था. तब मनमोहन सिंह ने माना था कि देश में सबसे बड़ा खतरा नक्सली ताकतों का है और उनके खिलाफ जिस तरह की सफलता की उम्मीद थी वो नहीं मिल पाई है. उन्होंने कहा था कि खतरा अभी टला नहीं है.
मनमोहन सिंह ने तब कहा था, '' सेंट्रल भारत में नक्सलियों की ग्रोथ चिंता का विषय है, ये समस्या आदिवासियों के लिए सबसे ज्यादा है. नक्सलियों का मजबूत होना विकास की रफ्तार को रोक सकता है, हम विकास करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन कुछ ग्रुप या लोगों को कानून को अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है. इस तरह के गुटों के खिलाफ हम कठिन कार्रवाई करेंगे.''
अभी राहुल ने क्या कहा...
वामपंथी विचारकों के घरों पर छापेमारी और गिरफ्तारी की वाम दलों और कांग्रेस ने निंदा की है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि भारत में केवल एक एनजीओ के लिए जगह है, जिसका नाम आरएसएस है. बाकी सारे एनजीओ को ताला लगा दो. सारे एक्टिविस्टों को जेल में डाल दो और जो इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं उन्हें गोली मार दो. नए भारत में आपका स्वागत है.