Tuesday, October 9, 2018

तक भारत 11वां सबसे अमीर देश बनेगा, 5 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगी संपत्ति

नई दिल्ली. साल 2022 तक भारत दुनिया का 11वां सबसे अमीर देश बन जाएगा। इस दौरान देश की निजी संपत्ति में 13% बढ़ोतरी का अनुमान है। तीन साल बाद यह मौजूदा 3 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 5 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगी। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की द ग्लोबल वेल्थ-2018 रिपोर्ट में यह उम्मीद जताई गई।
बीसीजी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 तक भारत की रैंक में चार पायदान का सुधार होगा। यह स्विटजरलैंड, हॉन्गकॉन्ग, नीदरलैंड और ताइवान को पीछे छोड़ देगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2012 से भारत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) 12% रही है। चीन के बाद भारत ही ऐसा देश है जिसका सीएजीआर पर्सनल वेल्थ के हिसाब से डबल डिजिट में रहा।
भारत समृद्ध, हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ कैटेग्री में एशिया का 5वां सबसे बड़ा बाजार है। यहां समृद्ध लोगों की संख्या 3 लाख 22 हजार है। इस श्रेणी में 10 लाख डॉलर तक संपत्ति वाले लोग शामिल हैं।
देश में हाई नेटवर्थ वाले अमीरों की संख्या 87 हजार है। इनकी संपत्ति 10 लाख डॉलर से 2 करोड़ डॉलर के बीच है। अल्ट्रा हाई नेटवर्थ कैटेग्री वाले 4 हजार लोग हैं। इनकी वेल्थ 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा है।
पर्सनल वेल्थ में फिलहाल अमेरिका 80 लाख करोड़ डॉलर के साथ टॉप पर है। साल 2022 तक यह 100 लाख करोड़ डॉलर पहुंचने की उम्मीद है। चीन की निजी संपत्ति 21 लाख करोड़ डॉलर है। तीन साल में यह दोगुनी होकर 43 लाख करोड़ डॉलर पहुंचने की उम्मीद है।पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि भारतीय कंपनियां नवंबर में भी ईरान से तेल की खरीदारी जारी रखेंगी। इसके लिए ईरान पर लगने वाले अमेरिकी प्रतिबंध की चिंता नहीं की जाएगी। वहीं, ओमान और यूएई में भारत के राजदूत रह चुके तलमीज अहमद ने सलाह दी कि तेल के मुद्दे पर भारत को ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाने की जरूरत नहीं है। अमेरिका से उलझना हमें भारी पड़ सकता है। 

हमारी जरूरतें समझेंगे वैश्विक नेता : प्रधान ने कहा कि हम अपनी घरेलू जरूरतों को हर हाल में पूरा करेंगे। वहीं, हमारी कुछ कंपनियों ने नवंबर के लिए ईरान को ऑर्डर दे दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैश्विक नेता हमारी जरूरतों को जरूर समझेंगे। 2015 की परमाणु डील रद्द होने के बाद अमेरिका ने जुलाई 2018 में ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए, जो 4 नवंबर से लागू होंगे। इसके बाद ट्रम्प ने कहा था कि दुनिया का कोई भी देश ईरान से तेल नहीं खरीदेगा।

भारत बातचीत से निकाले रास्ता : तलमीज ने कहा कि भारतीय नेता ईरान से अपने संबंधों को बरकरार रखने की कोशिश में हैं, लेकिन अमेरिका के रुख को देखते हुए अभी यह मुमकिन नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि भारत को फिलहाल ईरान से तेल आयात कम कर देना चाहिए। साथ ही, अमेरिका से इस मुद्दे पर बात करके रास्ता निकालना चाहिए।

ईरान को दिया गया ऑर्डर : सूत्रों के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने नवंबर में 12.5 लाख टन क्रूड ऑयल के लिए ईरान को ऑर्डर दे दिया है।

लगातार बढ़ रही ब्रेंट क्रूड की कीमत : ईरान के लगातार घटते तेल आयातक देशों की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ गई है। मंगलवार को यह 84 डॉलर/बैरल के पार रहा। यह एक साल में तेल के दाम में 23% की बढ़ोतरी हो चुकी है।

वेनेजुएला से भी सप्लाई घटी : विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंध के कारण ईरान से रोजाना तेल की 15-20 लाख बैरल सप्लाई बंद हो जाएगी। आर्थिक संकट के कारण वेनेजुएला में भी सप्लाई घट रही है। इससे दिसंबर के बाद दाम 100 डॉलर तक जा सकते हैं।

100 डॉलर पहुंच सकते हैं कच्चे तेल के दाम : इससे पहले अगस्त 2014 में तेल 100 डॉलर/बैरल का स्तर पार कर गया था। रुपया कमजोर होने से भारत पर इसका दोहरा असर हो रहा है। हाल के महीनों में क्रूड महंगा होने के कारण अमेरिका तेल उत्पादन करने वाले देशों पर प्रोडक्शन बढ़ाने का दबाव बना रहा है।