Tuesday, December 11, 2018

بيرناس يحضر الاتفاق على فترتين

واصل الفريق الأول لكرة القدم بنادي الاتفاق تدريباته اليومية على الملعب الرديف بالنادي تحت إشراف الإسباني سيرخيو بيرناس على فترتين.

وخصص سيرخيو الفترة الأولى لتدريب مدافعي الفريق والفترة الثانية لبقية اللاعبين، وتنوعت التدريبات بين لياقية وفنية، وكان قد سبق كل فترة اجتماع بين المدرب واللاعبين، تحدث من خلالها عن أبرز الملاحظات في المباراة السابقة، وشدد على أهمية التركيز والانضباط في التدريبات، لأهمية الجولات المقبلة.
من جهة أخرى، واصل لاعبا الوسط حامد الغامدي والسلوفاكي فيليب كيش برنامجهما العلاجي مع طبيب الفريق، كما حضر المدافع سعيد الربيعي بعد تعرضه لتمزق في العضلة الضامة في المباراة السابقة، وشهدت التدريبات غياب اللاعب عبدالرحمن العبود لارتفاع درجة حرارته بسبب الأنفلونزا. وافق الاتحاد السعودي للشطرنج على طلب الاتحاد الدولي للشطرنج لنقل النسخة الثانية من بطولة الملك سلمان للشطرنج السريع والخاطف من مدينة الرياض إلى مدينة إلى سانت بطرسبرغ في روسيا الشهر الجاري، ومشاركة الاتحاد الروسي للشطرنج في استضافتها، مع احتفاظ البطولة بالاسم ذاته، وذلك نظير العلاقة القوية التي تجمع بين المملكة العربية السعودية وروسيا.

يشار إلى أن العلاقة القوية التي تجمع الهيئة العامة للرياضة والاتحاد السعودي للشطرنج من جهة والاتحاد الدولي للعبة من جهة ثانية أسفرت عن نجاح تنظيم النسخة الأولى من بطولة الملك سلمان للشطرنج السريع والخاطف بالعاصمة الرياض في كانون الأول (ديسمبر) من عام ٢٠١٧، وسط مشاركة مجموعة من أفضل العقول في هذه اللعبة الشهيرة. في إطار جهودها المتواصلة لتعزيز مكانة العلا كوجهة سياحية استثنائية للتراث والفنون والثقافة والرياضة، أعلنت الهيئة الملكية لمحافظة العلا أمس (الأحد) موعد انطلاق البطولة الدولية لسباق القدرة والتحمّل على كأس خادم الحرمين الشريفين الملك سلمان بن عبد العزيز، والتي تقام تحت شعار «ملتقى الفرسان» في الثاني من شباط (فبراير) المقبل تحت إشراف الاتحاد السعودي للفروسية. وتحمل البطولة، التي ستنطلق لمسافة 120 كيلومتراً في محافظة العلا، تصنيف نجمتين بالمطابقة مع اشتراطات الاتحاد الدولي للفروسية. كما تعد البطولة واحدة من أهم وأغلى البطولات على مستوى العالم والشرق الأوسط وشمال أفريقيا، حيث رصدت اللجنة المنظمة التابعة للهيئة الملكية لمحافظة العلا جوائز عينية ومالية تصل إلى 8 ملايين ريال سعودي للفائزين في البطولة.

وعن إطلاق «ملتقى الفرسان»، صرّح الأمير بدر بن عبدالله بن محمد بن فرحان محافظ الهيئة الملكية لمحافظة العلا، قائلًا: «تأتي البطولة الدولية لسباق القدرة والتحمّل على كأس خادم الحرمين الشريفين، تأكيداً على حرص مولاي خادم الحرمين الشريفين الملك سلمان بن عبد العزيز آل سعود – حفظه الله وأيده، والأمير محمد بن سلمان بن عبدالعزيز آل سعود ولي العهد نائب رئيس مجلس الوزراء وزير الدفاع، على استكمال مسيرة التنمية الشاملة ضمن إطار رؤية المملكة 2030، لتمكين السياحة في محافظة العلا وإبراز مكانتها التاريخية كوجهة للثقافة والتراث، وأهميتها كمركز لتربية الخيول العربية الأصيلة».

Tuesday, November 27, 2018

की जगह अब आईटीईपी कोर्स, फिलहाल बीएड-डीएलएड चलता रहेगा

सरकारी स्कूल में अध्यापक बनना चाहते हैं तो अब आपको बीएड या डीएलएड जैसे कोर्स करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई) ने दो नए कोर्स लॉन्च किए हैं। इंटीग्रेटड टीचर एजुकेशन प्रोगाम (आईटीईपी) कोर्स चार साल का होगा। एनसीटीई ने एक नोटिफिकेशन जारी कर सत्र 2019-23 के लिए आईटीईपी कोर्स संचालित करने के इच्छुक शिक्षण संस्थानों से ऑनलाइन आवेदन मंगाए हैं। संस्थान 3 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
अभी तक प्री प्राइमरी से प्राइमरी स्तर तक की कक्षाओं में पढ़ाने के लिए डीएलएड जरूरी था। वहीं, अपर प्राइमरी से सेकेंडरी स्तर तक केो स्कूलों में अध्यापन कार्य के लिए बीएड करना अनिवार्य था। लेकिन अब एनसीटीई चार वर्षीय इंटिग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम(आईटीईपी) शुरू करने जा रहा है। इसका मतलब यह है कि प्राइमरी या फिर अपर प्राइमरी और इंटरमीडिएट में पढ़ाने के लिए अभ्यर्थियों को अब बीटीसी, डीएसएड या फिर बीएड का कोर्स नहीं करना पड़ेगा।
अगर कैंडिडेट ने चार साल का इंटीग्रेटेड टीचर एजूकेशन प्रोग्राम पूरा कर लिया है तो उसके लिए टीईटी, एसटीईटी या स्टेट लेवल के अन्य टेस्ट क्लियर करके टीचर बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
एक आईटीईपी प्री प्राइमरी से प्राइमरी स्तर तक पढ़ाने के लिए होगा, जबकि दूसरा आईटीईपी कोर्स अपर प्राइमरी से सेकेंडरी स्तर तक पढ़ाने के लिए होगा। दोनों ही पाठ्यक्रमों की अवधि चार वर्ष की होगी और इनमें 12वीं के बाद दाखिला मिलेगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए ग्रेजुएशन की जरूरत नहीं होगी।
राज्य सरकार करेगी फैसला कि दाखिला एंट्रेंस टेस्ट से होगा या मेरिट के आधार पर
कोई भी कॉलेज, जिसमें बीएड के साथ एमएड या बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हों (कंपोजिट कॉलेज), वे आईटीईपी कोर्स संचालित करने की मान्यता ले सकते हैं। अभी तक डीएलएड की संबद्धता राज्य सरकार के शिक्षा विभाग और बीएड की संबद्धता संबंधित विश्वविद्यालय से मिलती थी लेकिन इन दोनों पाठ्यक्रमों की संबद्धता सीधे विश्वविद्यालय से मिलेगी और मान्यता एनसीटीई की रहेगी। कोर्स में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट या फिर मेरिट के आधार पर होगा, इस बात का फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी। .
प्रत्येक कॉलेज में मिलेंगी 50 सीटें
एनसीटीई की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक आईटीईपी के लिए एक यूनिट 50 सीटों की होगी। बीएड-एमएड वाले संस्थान को इस कोर्स के लिए 500 वर्ग मीटर भूमि और 400 वर्ग मीटर बिल्डिंग तैयार करनी होगी। किसी नए संस्थान को यह कोर्स संचालित करने के लिए बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे कोर्स के साथ यह कोर्स मिलेगा। इसके लिए उन्हें कम से कम 3000 वर्ग मीटर भूमि खरीदनी होगी। यह मानक केवल 50 सीटों के लिए है। एक कॉलेज इससे अधिक सीटें भी ले सकता है, जिसके हिसाब से भूमि और इमारत की सीमा बढ़ जाएगी।
फिलहाल बीएड-डीएलएड चलता रहेगा
एनसीटीई ने जो दो नए पाठ्यक्रम लांच किए हैं, उनकी संबद्धता सत्र 2019-20 से मिलेगी। लिहाजा, फिलहाल दो वर्षीय बीएड और एक वर्षीय डीएलएड कोर्स चलता रहेगा। अभी एनसीटीई ने इन्हें बंद करने की कोई घोषणा नहीं की है।

Wednesday, November 7, 2018

पीएम मोदी ने भारत-चीन सीमा के पास सैनिकों के साथ मनाई दिवाली

उत्तरकाशीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा के पास बर्फीले पहाड़ों पर सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के जवानों के साथ बुधवार को दिवाली मनाई. मोदी ने जवानों से कहा कि दूर-दराज के इलाकों में बर्फीले पहाड़ों पर ड्यूटी करने की उनकी लगन राष्ट्र की ताकत को और मजबूत बनाती है. हर्षिल छावनी क्षेत्र में जवानों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अपनी प्रतिबद्धता और अनुशासन के जरिये 125 करोड़ भारतीयों के सपने एवं भविष्य को सुरक्षित करते हैं और लोगों में सुरक्षा और निडरता का भाव पैदा करने में मदद करते हैं.
मोदी ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की मौजूदगी में सैनिकों से कहा, ‘‘आप हमारी जमीन के केवल एक कोने की रक्षा नहीं कर रहे हैं. देश की सरहदों की सुरक्षा करके, आप 125 करोड़ भारतीयों के सपनों और जिंदगियों की सुरक्षा कर रहे हैं.’’
जवानों और दिवाली के दौरान जलने वाले दीयों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया को रोशनी देने के लिये जिस तरह दीया स्वयं को जलाता है उसी तरह आप भी देश की सुरक्षा करने के लिये अपने जीवन का बलिदान देते हैं.’’ बलों के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने करियर की शुरुआत में सैनिकों के साथ समय बिताने का मौका मिला और वह उनकी जरूरतों को लेकर संवेदनशील हैं.उन्होंने पूर्व सैनिकों के लिए लंबे समय से अटके ‘वन रैंक, वन पेंशन’ लागू करने को रक्षाकर्मियों के साथ उनके लंबे जुड़ाव का नतीजा बताया.
मोदी ने कहा, ‘‘आरएसएस सदस्य के रूप में, मुझे सेना के जवानों के बीच रहने का मौका मिला. उस समय, मैंने ‘वन रैंक, वन रेंशन’ के बारे में बहुत सुना था. कई सरकारें आईं और चली गईं. चूंकि मैं आपसे जुड़ा रहा था, मैंने आपकी भावनाओं को समझा. इसलिए प्रधानमंत्री बनने के बाद, आपके सपने को पूरा करना मेरी जिम्मेदारी थी.’’ प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘भले ही इसे लागू करने के लिए 12 हजार करोड़ रुपये की बड़ी राशि की जरूरत थी, इसे पूरा किया गया. आज मैं खुश हूं कि 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक ‘वन रैंक, वन पेंशन’ के तहत खर्च हो चुके हैं.’’
उन्होंने आईटीबीपी के जवानों के साथ सालों पहले हुई बातचीत का भी जिक्र किया जब वह कैलाश मानसरोवर यात्रा का हिस्सा बने थे.मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत अच्छी प्रगति कर रहा है. मोदी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा मिशनों में दुनिया भर से प्रशंसा और सराहना हासिल की है. अपने संबोधन के बाद, प्रधानमंत्री ने जवानों को मिठाई बांटी. वह सीमावर्ती गांव बागोरी के लोगों से भी मिले और उन्होंने हर्षिल में गंगा की सहायक नदी भागीरथी के तट पर पूजा अर्चना की.
मोदी हर्षिल में करीब सवा घंटा रूके. यह एक छावनी इलाका है जो उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा के करीब 7,860 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने केदारनाथ जाकर पूजा अर्चना की और केदारपुरी में चल रही पुनर्निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. शीतकाल के लिये कपाट बंद होने से दो दिन पूर्व मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री ने वहां करीब दो घंटे बिताये. उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में करीब 10—15 मिनट गुजारे और इस दौरान भगवान शिव का रूद्राभिषेक किया. केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी टी गंगाधर लिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीर्थ पुरोहित प्रवीण तिवारी ने मंदिर में पूजा संपन्न करायी.
उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ मौजूद थे .गर्भगृह से बाहर आने के बाद मोदी ने मंदिर की परिक्रमा की और पिछले कुछ दिनों में धाम में हुई हिमपात से खूबसूरत दिखायी दे रहे नजारे का भी दीदार किया .प्रधानमंत्री ने मंदिर प्रांगण में लगायी गयी केदारनाथ की तस्वीरों का भी अवलोकन किया जिसमें वर्ष 2013 में आयी प्रलयंकारी भीषण आपदा से उजड गये केदारनाथ क्षेत्र के पुनर्निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया था .
केदारनाथ के समीप स्थित केदारपुरी ने 2013 की प्रलयकारी बाढ़ का दंश झेला था जिसमें हजारों लोग मारे गए थे.प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि मोदी ने पूरे मंदिर परिसर का दौरा किया जहां पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कार्य की प्रगति से अवगत कराया.मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग 'आस्था पथ' के दोनों ओर खडे़ श्रद्धालुओं तथा स्थानीय लोगों का भी प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया और उन्हें दिवाली की शुभकामनायें भी दीं .
प्रधानमंत्री इससे पहले अक्टूबर 2017 में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से ठीक पहले भगवान के दर्शन के लिए आए थे.वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने दिवाली सियाचिन में जवानों के साथ मनाई थी.वर्ष 2015 में वह दिवाली पर पंजाब सीमा पर गये थे. इसके अगले वर्ष मोदी हिमाचल प्रदेश गये थे जहां उन्होंने आईटीबीपी पुलिस के जवानों के साथ एक सुरक्षा चौकी पर सम बिताया था.मोदी ने पिछले साल प्रधानमंत्री के रूप में अपनी चौथी दिवाली जम्मू कश्मीर के गुरेज में सैनिकों के साथ मनाई थी.

Tuesday, October 9, 2018

तक भारत 11वां सबसे अमीर देश बनेगा, 5 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगी संपत्ति

नई दिल्ली. साल 2022 तक भारत दुनिया का 11वां सबसे अमीर देश बन जाएगा। इस दौरान देश की निजी संपत्ति में 13% बढ़ोतरी का अनुमान है। तीन साल बाद यह मौजूदा 3 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 5 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगी। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की द ग्लोबल वेल्थ-2018 रिपोर्ट में यह उम्मीद जताई गई।
बीसीजी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 तक भारत की रैंक में चार पायदान का सुधार होगा। यह स्विटजरलैंड, हॉन्गकॉन्ग, नीदरलैंड और ताइवान को पीछे छोड़ देगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2012 से भारत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) 12% रही है। चीन के बाद भारत ही ऐसा देश है जिसका सीएजीआर पर्सनल वेल्थ के हिसाब से डबल डिजिट में रहा।
भारत समृद्ध, हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ कैटेग्री में एशिया का 5वां सबसे बड़ा बाजार है। यहां समृद्ध लोगों की संख्या 3 लाख 22 हजार है। इस श्रेणी में 10 लाख डॉलर तक संपत्ति वाले लोग शामिल हैं।
देश में हाई नेटवर्थ वाले अमीरों की संख्या 87 हजार है। इनकी संपत्ति 10 लाख डॉलर से 2 करोड़ डॉलर के बीच है। अल्ट्रा हाई नेटवर्थ कैटेग्री वाले 4 हजार लोग हैं। इनकी वेल्थ 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा है।
पर्सनल वेल्थ में फिलहाल अमेरिका 80 लाख करोड़ डॉलर के साथ टॉप पर है। साल 2022 तक यह 100 लाख करोड़ डॉलर पहुंचने की उम्मीद है। चीन की निजी संपत्ति 21 लाख करोड़ डॉलर है। तीन साल में यह दोगुनी होकर 43 लाख करोड़ डॉलर पहुंचने की उम्मीद है।पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि भारतीय कंपनियां नवंबर में भी ईरान से तेल की खरीदारी जारी रखेंगी। इसके लिए ईरान पर लगने वाले अमेरिकी प्रतिबंध की चिंता नहीं की जाएगी। वहीं, ओमान और यूएई में भारत के राजदूत रह चुके तलमीज अहमद ने सलाह दी कि तेल के मुद्दे पर भारत को ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाने की जरूरत नहीं है। अमेरिका से उलझना हमें भारी पड़ सकता है। 

हमारी जरूरतें समझेंगे वैश्विक नेता : प्रधान ने कहा कि हम अपनी घरेलू जरूरतों को हर हाल में पूरा करेंगे। वहीं, हमारी कुछ कंपनियों ने नवंबर के लिए ईरान को ऑर्डर दे दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैश्विक नेता हमारी जरूरतों को जरूर समझेंगे। 2015 की परमाणु डील रद्द होने के बाद अमेरिका ने जुलाई 2018 में ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए, जो 4 नवंबर से लागू होंगे। इसके बाद ट्रम्प ने कहा था कि दुनिया का कोई भी देश ईरान से तेल नहीं खरीदेगा।

भारत बातचीत से निकाले रास्ता : तलमीज ने कहा कि भारतीय नेता ईरान से अपने संबंधों को बरकरार रखने की कोशिश में हैं, लेकिन अमेरिका के रुख को देखते हुए अभी यह मुमकिन नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि भारत को फिलहाल ईरान से तेल आयात कम कर देना चाहिए। साथ ही, अमेरिका से इस मुद्दे पर बात करके रास्ता निकालना चाहिए।

ईरान को दिया गया ऑर्डर : सूत्रों के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने नवंबर में 12.5 लाख टन क्रूड ऑयल के लिए ईरान को ऑर्डर दे दिया है।

लगातार बढ़ रही ब्रेंट क्रूड की कीमत : ईरान के लगातार घटते तेल आयातक देशों की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ गई है। मंगलवार को यह 84 डॉलर/बैरल के पार रहा। यह एक साल में तेल के दाम में 23% की बढ़ोतरी हो चुकी है।

वेनेजुएला से भी सप्लाई घटी : विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंध के कारण ईरान से रोजाना तेल की 15-20 लाख बैरल सप्लाई बंद हो जाएगी। आर्थिक संकट के कारण वेनेजुएला में भी सप्लाई घट रही है। इससे दिसंबर के बाद दाम 100 डॉलर तक जा सकते हैं।

100 डॉलर पहुंच सकते हैं कच्चे तेल के दाम : इससे पहले अगस्त 2014 में तेल 100 डॉलर/बैरल का स्तर पार कर गया था। रुपया कमजोर होने से भारत पर इसका दोहरा असर हो रहा है। हाल के महीनों में क्रूड महंगा होने के कारण अमेरिका तेल उत्पादन करने वाले देशों पर प्रोडक्शन बढ़ाने का दबाव बना रहा है।

Thursday, September 27, 2018

अडल्ट्री अब अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया 158 साल पुराना क़ानून

सुप्रीम कोर्ट ने अडल्ट्री यानी व्याभिचार को अपराध बताने वाले क़ानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया है.
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खनविलकर, जस्टिस आरएफ़ नरीमन, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में कहा कि व्याभिचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 497 संविधान के ख़िलाफ़ है.
मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस खनविलकर ने कहा,"हम आईपीसी की धारा 497 और आपराधिक दंड संहिता की धारा 198 को असंवैधनिक क़रार देते हैं."
जस्टिस नरीमन ने कहा कि ये क़ानून समानता के अधिकार और महिलाओं को एकसमान अधिकारों के प्रावधान का उल्लंघन है.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अडल्ट्री तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं है.
इसके साथ ही कोर्ट ने 1860 में बने इस 158 साल पुराने क़ानून को असंवैधानिक करार दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि ये क़ानून मनमाना है और समानता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है.
इटली में रहने वाले एनआरआई जोसेफ़ शाइन ने दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. उनकी अपील थी कि आईपीसी की धारा 497 के तहत बने अडल्ट्री क़ानून में पुरुष और महिला दोनों को ही बराबर सज़ा दी जानी चाहिए.
इस याचिका के जवाब में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ऐसा करने के लिए अडल्ट्री क़ानून में बदलाव करने पर क़ानून हल्का हो जाएगा और समाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा. जानकार मानते हैं कि इस फ़ैसले का असर कई और मामलों पर भी पड़ सकता है.
1860 में बना अडल्ट्री क़ानून लगभग 158 साल पुराना था. इसके तहत अगर कोई पुरुष किसी दूसरी शादीशुदा औरत के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है, तो महिला के पति की शिकायत पर पुरुष को अडल्ट्री क़ानून के तहत गुनहगार माना जाता था.
ऐसा करने पर पुरुष को पांच साल की क़ैद और जुर्माना या फिर दोनों ही सज़ा का प्रवाधान था.
संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में खेले जा रहे एशिया कप में बांग्लादेश ने सुपर-4 के मुक़ाबले में पाकिस्तान को हराकर फ़ाइनल में धमाकेदार एंट्री ली है.
अबू धाबी में खेले गए इस मुक़ाबले में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 37 रन से हरा दिया. बांग्लादेश ने मुशफिकर ( ) और मिथुन (
तो क्या तकरीबन डेढ़ साल पहले वनडे टीम की कमान संभालने वाले सरफ़राज़ अहमद संकेत दे रहे हैं कि वो कप्तानी छोड़ने जा रहे हैं.
) की बेहतरीन पारियों और दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 144 रन की साझेदारी के दम पर 48.5 ओवरों में 239 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान की टीम निर्धारित 50 ओवरों में नौ विकेट पर 202 रन ही बना सकी.
इसके साथ ही पाकिस्तान के टूर्नामेंट के फ़ाइनल में पहुँचाने के सपने भी बिखर गए और बांग्लादेश की टीम तीसरी बार एशिया कप के फ़ाइनल में पहुँचने में कामयाब रही. फ़ाइनल में बांग्लादेश के सामना भारत से होगा.
टूर्नामेंट में पाकिस्तान का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. भारत से पाकिस्तान की टीम अपने दोनों मुक़ाबले हारी और अफ़ग़ानिस्तान को बामुश्किल हरा सकी.
पाकिस्तान की टीम हार से मायूस नज़र आई और इसके कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने इस बात को माना भी. सरफ़राज़ ने कहा, "अच्छा नहीं लग रहा है. हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं था. बतौर कप्तान मैंने भी अच्छा नहीं किया, मैंने टीम को ठीक से लीड नहीं किया."र्नामेंट में सरफ़राज़ के बतौर कप्तान लिए गए फ़ैसलों पर काफ़ी चर्चा हुई. बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में भी जब टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेल रहे जुनैद ख़ान ने बांग्लादेश को चार ओवरों में दो झटके दिए तो सरफ़राज़ ने उन्हें गेंदबाज़ी आक्रमण से हटा दिया.
इसके बाद बांग्लादेश के बल्लेबाज़ों मुशफिकर और मिथुन ने विकेट पर लंगर डाल दिया और दोनों ने 144 रनों की साझेदारी कर दी.
आकाश चोपड़ा ने ट्वीट किया, "सरफ़राज़ ने मैच को मुड़ जाने दिया....चैंपियंस ट्रॉफी में सफलता के बाद उन्हें बहुत ज़्यादा आंका था. एशिया कप में वो इसका अंश भर ही नज़र आए."
सरफ़राज़ को पिछले साल फ़रवरी में अज़हर अली की जगह पाकिस्तान की वनडे टीम की कप्तानी सौंपी गई थी. 2015 के वर्ल्ड कप में क्वार्टर फ़ाइनल में शिकस्त के बाद मिस्बाह उल हक़ ने अचानक वनडे से संन्यान लेने का ऐलान कर दिया था और इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अज़हर अली को कप्तान नियुक्त किया था.
इसके बाद सरफ़राज़ ने इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफ़ी में टीम का नेतृत्व करते हुए फ़ाइनल में भारत को शिकस्त दी थी और अपनी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता का सबूत दिया था.
ख़ैर, बात एशिया कप में पाकिस्तान के प्रदर्शन की करें तो पूरे टूर्नामेंट में उसके बल्लेबाज़ रनों के लिए जूझते रहे.
विकेट पर अच्छी तरह जमने के बाद बल्लेबाज़ों ने जिस तरह अपने विकेट फेंके उससे निश्चित तौर पर टीम प्रबंधन परेशान होगा. अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ मुकाबले को ही लें, बाबर आज़म और इमाम उल हक़ ने हाफ़ सेंचुरियां बनाईं और फिर आउट हो गए. ख़ास बात ये रही कि दोनों ने धीमी बल्लेबाज़ी की. पाकिस्तान टीम में इकलौते शोएब मलिक ही रहे जिन्होंने अपनी बल्लेबाज़ी में निरंतरता दिखाई.

Monday, September 17, 2018

在野火肆虐的加州,水管理机制成为焦点

月末燃起的“门多西诺复合大火”是加州历史上最大的一场野火,过火面积30万英亩,其中大多数是林地。加州面临的问题是如此规模的大火并非个例。

加州20起最大的野火中有15起是本世纪发生的。并且,该州记录上最具破坏性的大火中有6起发生在过去十个月内。

气候变化使火情更加恶化,让应对更加棘手。与此同时,特朗普政府继续采取狭隘商业利益优先的土地管理方式,但未采取任何火灾防控措施,对气候风险视而不见。

这些大火让加州全境水资源短缺这样一个长期存在的环境危机成为关注的焦点。围绕(深受气候变化影响的)供水管理的讨论如火如荼,因为这与加州居民和企业的未来前景息息相关。

1970年以来,美国西部的温度上升幅度是全球平均的2倍。今年7月是加州有记录以来最热的一个月份。据加州大学洛杉矶分校气候科学家丹尼尔·斯万说,加州近来一半的野火要归因于气候变化引起的极热天气。

斯万说:“供野火肆虐的林地……前所未有的干燥,去年冬天的低降水量、今夏的极度高温、再加上长期干旱的影响,共同造成了这一结果。”

根本原因

加州人口和经济的增长再加上糟糕的规划工作,使更多人和建筑面临风险。野火活跃度的增加意味着加州和其他州用于灭火的支出增加了,而留给防火的钱则减少了。

克林顿和奥巴马政府期间担任美国内政部副部长的大卫·海斯说:“如果你否认变化的复杂性和影响的显著性,你就不会拿出足够的资源对其作出反应。”

特朗普政府对于野火与气候变化之间的联系轻描淡写,这毫不奇怪。

现任内政部长莱恩·辛克一开始就否认二者的联系,然后接着说:“很清楚,夏季变长了,干旱更干、温度更高。毫无争议的是,已死和将死的树木成了大规模野火的驱动力……这就是各种不利因素共同导致的一场‘完美风暴’,无论你是否相信气候变化,都不会减轻政府林业主管部门的责任。”

对于辛克和特朗普政府的其他成员来说,气候变化的明显迹象给他们的工作平添了麻烦,因为他们要放宽环境法规来开创新的商机,而且通常是在之前受到保护的联邦土地上。

辛克将他的批评者们称为“环境恐怖主义”,这些人反对他“工业优先”的森林管理方式,很多人认为这种方式是对采伐者的救济。

特朗普用怪癖的风格对野火作出回应,抱怨稀缺的水资源用错了地方,建议应该把水“优先用于扑灭野火,而非保护濒危物种”。

但与其他用途相比,防火所需的水是微不足道的。加州消防员们已经说了有足够的水来灭火。

水归谁手

不过,特朗普总统的发言无意中引起了人们对加州和美国西部另一项危机的关注,气候变化让这个危机更加严重,一触即发:谁在使用稀缺的水资源,用来做什么?

气候变化使加州的水危机更加严峻,导致干旱期更长,同时使内华达山脉的积雪减少,而加州四分之三以上的淡水都来自内华达山脉的积雪。科学家们也预测该地区的“降水摆动”事件将会增加。“降水摆动”是指气候在极湿和极干之间快速转变,从而使水资源配置更加困难,基础设施遭到破坏。

在水短缺的时候,围绕资源的政治斗争就会加剧。美国西部的水政治臭名昭著,历史上各种调水的大计划层出不穷。

洛杉矶的成功和发展要归因于通过一条数百英里长的欧文斯河引水渠。这项调水工程(有的人称之为“偷水”)的水权是通过可疑的方式和欧文斯河谷的破产农民获得的。

特朗普总统似乎对加州中央河谷的工业化农民很是同情。他们想要占有更多的水资源,而这里的一些水被拦在河中以保护三角洲胡瓜鱼和国王鲑等濒危物种。

这些农民在政治上很有影响力,水对他们来说很珍贵。与其他州相比,加州粮食产值更高。这里种植了美国三分之一的蔬菜和三分之二的水果和坚果,包括扁桃仁等“渴水”作物。

加州的火与水危机都很难解决。它们要求将公众的需要纳入稀缺资源的管理办法,而非只考虑特殊利益。这意味着水资源的管理和定价决策非常艰难,可能会伤害到某些集团,要么是强迫农民改变作物品种,要么强迫公众为他们的用水增加付费。

但显而易见,任何不考虑气候变化影响的方法终将失败。本周浓烟继续笼罩着美国西部,而在一些地区,朝阳都在浓烟映衬之下变得血红。

并非只有迷信的人会认为这可能预示着会发生更糟的事情。毕竟,美国西部正在燃烧,而水正在枯竭。

Monday, September 3, 2018

यूपी में बाढ़-बारिश से हाहाकार, 16 की मौत, वायु सेना ने 6 लोगों को हेलिकॉप्टर से बचाया

यूपी में भी बाढ़ ने कई जिलों में तबाही ला दी है. उत्तर प्रदेश के झांसी और ललितपुर में रविवार को अचानक आई बाढ़ में फंसे लोगों को वायु सेना की मदद से बाहर निकाला गया. प्रदेश के राहत आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि ललितपुर की तालबेहट तहसील में स्थित एक गांव अचानक भारी बारिश के कारण बाढ़ के पानी से घिर गया और वहां के छह निवासी फंस गए थे. वायु सेना की
कुमार ने बताया कि झांसी जिले की गरौठा तहसील में बेतवा नदी पर बने एरच बांध के नजदीक एक टापूनुमा जगह पर फंसे आठ मछुआरों को भी वायु सेना की मदद से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.
बारिश हुई जानलेवा
वहीं इसी बीच, प्रदेश में जानलेवा बनी बारिश की वजह से पिछले 24 घंटे के दौरान 16 लोगों की मौत हो गई तथा 12 अन्य जख्मी हो गए हैं. राहत आयुक्त कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान वज्रपात तथा बारिश के कारण मकान गिरने इत्यादि वर्षाजनित हादसों में कुल 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हो गई.
इसके अलावा सीतापुर में तीन, अमेठी तथा औरैया में दो-दो और लखीमपुर खीरी, रायबरेली एवं उन्नाव में एक-एक व्यक्ति की वर्षाजनित दुर्घटनाओं में मौत हुई है.  पूरे प्रदेश में ऐसे हादसों में 12 लोग जख्मी भी हुए हैं. इसके अलावा कुल 461 मकान अथवा झोपड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं.  शाहजहांपुर से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक जिले के कांठ क्षेत्र में खराब मौसम के बीच बिजली गिरने की घटनाओं में चार बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई तथा चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए.
आकाशीय बिजली का कहर
कांठ थाना क्षेत्र के शमशेरपुर गांव में कल शाम कुछ लड़के खेतों में पशु चरा रहे थे. इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई जिस से बचने के लिए वे बच्चे एक पेड़ के नीचे बैठ गए. इसी दौरान उस पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई. इस घटना में 24 वर्षीय मोहित नामक युवक के अलावा बबलू (05), अनमोल (10) तथा डबलू (11) की मौत हो गई है जबकि विपिन, रामकिशोर तथा एक अन्य लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया. इसी थाना क्षेत्र के नबीपुर गांव में खेतों में बकरी चरा रही 11 वर्षीय वंदना एवं सिकंदरपुर गांव में अशोक (42) को भी खराब मौसम के बीच गिरी बिजली ने चपेट में ले लिया जिससे उनकी भी घटनास्थल पर मौत हो गई.
जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने बताया कि उप जिलाधिकारी रामजी मिश्रा को घटनास्थल पर भेजा गया है साथ ही प्रत्येक मृतकों के परिजन को 12 घंटे के अंदर चार लाख रूपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है. मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अनेक इलाकों में बारिश हुई. अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में वर्षा होने का अनुमान है. असम में बारिश और बाढ़ का कहर जारी है.
टीम ने उन्हें सफलतापूर्वक बाहर निकाला.
इस बीच, केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जलभरण क्षेत्रों में व्यापक वर्षा की वजह से प्रदेश में गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा समेत अनेक नदियां उफान पर हैं. गंगा नदी नरौरा, अंकिनघाट और फर्रुखाबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. वहीं, कानपुर, गुमटिया, बलिया तथा डलमऊ में इसका जलस्तर लाल निशान के नजदीक बना हुआ है। रामगंगा नदी डाबरी में खतरे के चिह्न को पार गयी है, जबकि मुरादाबाद में यह इस निशान के करीब पहुंच चुकी है.
घाघरा नदी एल्गिनब्रिज, तुर्तीपार और अयोध्या में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. शारदा नदी का जलस्तर पलियाकलां में लाल चिह्न के पार बना हुआ है. वहीं शारदानगर में यह इस निशान के करीब पहुंच चुकी है. क्वानो नदी चंद्रदीपघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.
भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामलों में वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी वामपंथी विचारकों के ठिकाने पर हुई छापेमारी का विरोध किया. अब केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने उनपर पलटवार किया है.
रिजिजू ने बुधवार को ट्वीट किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माओवादियों को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था. लेकिन अब कांग्रेस अध्यक्ष खुले तौर पर माओवादियों के समर्थकों का समर्थन कर रहे हैं. देश की सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए
बता दें कि अक्टूबर, 2009 में बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब कुछ ऐसा ही बयान दिया था. तब मनमोहन सिंह ने माना था कि देश में सबसे बड़ा खतरा नक्सली ताकतों का है और उनके खिलाफ जिस तरह की सफलता की उम्मीद थी वो नहीं मिल पाई है. उन्होंने कहा था कि खतरा अभी टला नहीं है.
मनमोहन सिंह ने तब कहा था, '' सेंट्रल भारत में नक्सलियों की ग्रोथ चिंता का विषय है, ये समस्या आदिवासियों के लिए सबसे ज्यादा है. नक्सलियों का मजबूत होना विकास की रफ्तार को रोक सकता है, हम विकास करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन कुछ ग्रुप या लोगों को कानून को अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है. इस तरह के गुटों के खिलाफ हम कठिन कार्रवाई करेंगे.''
अभी राहुल ने क्या कहा...
वामपंथी विचारकों के घरों पर छापेमारी और गिरफ्तारी की वाम दलों और कांग्रेस ने निंदा की है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि भारत में केवल एक एनजीओ के लिए जगह है, जिसका नाम आरएसएस है. बाकी सारे एनजीओ को ताला लगा दो. सारे एक्टिविस्टों को जेल में डाल दो और जो इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं उन्हें गोली मार दो. नए भारत में आपका स्वागत है.

Friday, August 31, 2018

भैंस चोरी के आरोप में मॉब लिंचिंग का शिकार हुआ शाहरुख़

उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले में कुछ लोगों ने एक युवक को कथित तौर पर भैंस चुराने के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला. पुलिस ने इस मामले में क़रीब दो दर्जन अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज किया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
घटना बरेली के कैंट थाना क्षेत्र के डिंडोलिया गांव की है.

बरेली के नगर पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह के मुताबिक, "शाहरुख और उसके तीन दोस्त भैंस चुरा कर भाग रहे थे. गांव वालों ने उन्हें दौड़ा लिया. रास्ते में पानी भरा होने के कारण अन्य लड़के तैरकर भाग गए, लेकिन शाहरुख़ को तैरना नहीं आता था इसलिए वो गांववालों की पकड़ में आ गया और कई लोगों ने उसकी पिटाई कर दी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी अंदरूनी हिस्सों में मॉब लिंचिंग की वजह से ज़्यादा चोटें आने की पुष्टि हुई है."
पुलिस ने शाहरुख़ के भाई की तहरीर पर हत्या के आरोप में 20 से 25 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने बताया कि जिसकी भैंस चोरी हुई थी, उसकी तरफ़ से शाहरुख़ के साथियों के ख़िलाफ़ भी भैंस चोरी का केस दर्ज किया गया है.
बताया जा रहा है कि 17 वर्षीय शाहरुख़ दुबई में काम करते थे और बकरीद 

के मौक़े पर घर आए थे. शाहरुख़ के भाई फ़िरोज़ ख़ान ने बीबीसी को बताया, "मंगलवार की शाम मोहल्ले के ही दो-तीन लड़के उसे अपने साथ ले गए. वो देर रात तक घर नहीं आया. बुधवार की सुबह कैंट थाने के लोग हमारे घर आए कि शाहरुख़ ज़िला अस्पताल में भर्ती है. हम देखने गए तो उसकी सांसें चल रही थी, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पाया."
फ़िरोज़ का कहना है कि भैंस चुराने की बात पर उन्हें यक़ीन नहीं है क्योंकि वो तो दुबई में कमाता था और कुछ ही दिन के बाद फिर जाने वाला था, ऐसे में वो भैंस क्यों चुराएगा.


फ़िरोज़ के मुताबिक, "उसके दोस्त अपने साथ लेकर गए थे. जब लड़ाई-झगड़ा हुआ तो दोस्त भाग गए. पकड़ में आने पर और अकेला पाकर लोगों ने उसकी लाठी-डंडों से पिटाई की."
फ़िरोज़ के मुताबिक शाहरुख़ पांच भाई और दो बहनों में सबसे छोटा था, फ़िरोज़ ने बताया, "पिता बीमार रहते हैं और खिलौने बेचने का काम करते हैं. हम सभी लोग छोटे-मोटे काम करके अपना पेट पालते हैं लेकिन कभी किसी के यहां कोई चोरी नहीं की. शाहरुख़ तो वैसे भी बहुत सीधा था."


वहीं, गांव के कुछ लोगों का कहना है कि शाहरुख़ को अपने साथ ले जाने वाले माजिद और कुछ अन्य लोग भैंस चोरी जैसी घटनाओं में पहले भी शामिल रहे हैं. पुलिस भी सभी पहलुओं की जांच कर रही है. गांव में घटना के बाद तनाव को देखते हुए एहतियातन बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया

बरेली के स्थानीय पत्रकार मनवीर सिंह बताते हैं, "पहले तो पुलिस ये मानने को तैयार ही नहीं थी कि शाहरुख की मौत मॉब लिंचिंग की वजह से हुई है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने इस बात को स्वीकार किया और ख़ुद एसपी सिटी ने पत्रकारों को ये जानकारी दी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि गांव वालों ने शाहरुख़ की बड़ी बेरहमी से पिटाई की जिससे उसके शरीर में काफी चोटें आईं और अगले ही दिन उसकी मौत हो गई. मौत न हुई होती तो शायद पिटाई की रिपोर्ट दर्ज ही न हुई होती और मामला सिर्फ़ भैंस चोरी का बताकर रफ़ा-दफ़ा कर दिया जाता."
 है.
परिवारवालों और गांव के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने पहले इस घटना को गंभीरता से लिया ही नहीं, लेकिन जब शाहरुख़ की मौत हो गई तब जाकर घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई.

Thursday, August 30, 2018

中美气候联合声明能够“改变各自国内争论导向”

上周,中美两国在北京发布应对气候变化减排目标这一新闻,在我们看来具有里程碑式的意义。在应对气候变化这个问题上,没有哪个国家能够比这两个国家的角色更有分量了:美国是过去两个世纪时间里最大的碳排放国,而中国则是当下最大的碳排放国。当很多观察人士都将目光集中于联合声明对即将到来的国际磋商的影响时,我们认为,这个声明也极有可能在两国内部激起深远的影响。对美国来说,联合声明不论是在法律层面还是在政治层面,都将对奥巴马总统以治理发电厂为核心的气候政策产生非常重要的影响。对中国来说,这项声明是一个讯号——经济转型仍然是个任重而道远的目标。中美两国都将需要克服来自国内的阻力才能实现各自的既定目标,但在我们看来,联合声明增加了中美两国国家领导人手中的砝码。

美国国内的反对声

美国环境保护署提出的发电厂减排新规(即清洁电力计划)要求,到2030年,美国各州需将电力系统的排放量在2005年的基础上降低30%。若无这些规定或与之相似的其他规定,美国将无法达到此次在北京所做声明中承诺的降低26~28%的目标。但清洁电力计划也是国会共和党指责奥巴马总统凌驾于法律之上、利用自己的权利,绕过国会达到自己目的的最重要的证据之一。一旦清洁电力计划最终敲定,那些生意受到新规影响的电力公司,以及那些不愿执行该计划的保守党州政府将会对其展开猛烈的法律攻击。但重要的是,总统并不需要国会来推进自己的政策;他只需要立法机构不对环境保护署的工作进行过多干预,以及需要法院尊重他的监管策略。

从政治层面上来说,中国在2030年左右达到排放峰值的承诺让那些反对美国采取行动消减温室气体排放的人失去了一个最有力的借口。之前他们认为,既然中国还在污染环境,美国的减排行为就会影响自己的经济。如果联合声明能够推动国际进程真正地向前发展,那么中国的承诺还将可能进一步提高。随着2016年新一届美国总统预选日期的临近,一些国会议员对于是否干预美国2030年减排计划举棋不定。共和党必然希望得到更多的选票,为此,他们可能不再继续纠结于环境保护署的行动。另外,他们还有可能会担心影响中美关系而投鼠忌器。而且,这个声明还会增强总统的信心,否决未来任何有可能会对环境保护署的权限构成限制的法案。

美中联合声明还可能对清洁电力计划实施后将遭遇的法律挑战产生一些微妙的影响。这些挑战即便只是走法庭程序也要耗费许多年,并且很有可能最终在美国最高法院庭审过程中落败。虽然这些法律挑战将对清洁电力计划是否完全符合清洁空气法案等法律技术问题展开攻击,但法官也不可能对实际情况完全置之不理。如果清洁电力计划是美国履行国际义务、遏制温室气体排放增长的最主要的手段之一,同时,国际社会也在遏制排放量增长的行动中取得了显著进展,那么法院采纳清洁电力计划存在法律漏洞的观点的可能性就会相对较低。当然,联合声明带来的这一影响非常微妙。但这对于清洁电力计划能否顺利实施下去有着重大的作用。

中国的经济转型

要想真正解决气候变化问题,中国的承诺至关重要。中国是碳排放大国,排放量占全球的30%——约等于美国和欧盟国家排放量的总和。欧美的排放在减少,但中国的碳排放依然以很高的速度增加。

奥巴马总统的承诺面临着来自国内的巨大阻力。而人们通常以为,中国通过政令就能实现经济转型和能源政策改革,从而轻松实现气候目标。但是,中国长期以来一直都被无序、分散的政体所桎梏,改革面临着极大的阻力。那么,有什么理由让人相信,比起之前的环境目标,2030年的碳排放峰值目标更有可能实现呢?

最可信的原因就是,近年来,中国领导人逐步提高环境目标的重要性;更重要的是,他们将环保当作中国转变经济增长模式的载体。而反过来,确保中国的经济增长势头不减是政党国家体制执政合法性的核心。因此,中国经济转型的政治意愿促成了向低碳经济转型的政治诉求。中国严重的空气污染更有力地推动了这一发展趋势。近年来,中国的国家策略已经从重工业、出口和煤炭,渐渐转向了服务型、高附加值产业型经济,而它们都对能源有多元性需求。

但是,这一经济转型遭遇到了国内保守派利益团体的极力反对,比如电力、煤炭、钢铁、石油业的国有能源企业。因此,经济转型就变得前途未卜,能源安全风险在增加,中国的天空继续被污染所笼罩。要考量美中联合声明,就一定要考虑到这些现状。这是来自国家最高领导层的讯号,这个讯号就是经济转型依旧是头等大事。同时,这份前所未有的联合声明也暗示了,中国领导人相信他们可以集中一切国内力量完成这一目标。

Wednesday, August 29, 2018

中国和东南亚国家无视联合国水道公约

水资源长期以来一直是造成亚洲紧张局势的根源之一。中国青藏高原是十大主要河流的发源地,为沿岸约14亿居民提供水资源。但是目前,就水资源共享的问题还未达成任何多边协议。

中国和印度制定了雄心勃勃的水资源规划,这遭致了其他国家的反对。目前,工业用水需求增加,加之气候变化使得水资源供应无常,紧张局势一触即发。

《国际水道非航行使用法公约》于8月17日生效,成为了首个国家间水资源合作全球性法律框架。越南是签署该公约的第35个国家,签署90天后,该公约正式生效。但是,起草《公约》并获得足够数量的缔约国支持却花费了整整50年的时间。

1997年《公约》首次通过。当时,中国、土耳其和布隆迪投票反对,印度弃权。在此背景下,该公约能够发挥多大的效力?就此,我们采访了七位地区事务专家。

中外对话:目前,有关中国和南亚地区国际河流如何使用进行了诸多讨论,《公约》会对此产生重大影响吗?

斯里尼瓦斯·乔克库拉——新德里政策研究中心国家间水资源问题研究员

由于南亚国家和中国均未批准实施《公约》,因而在法律上,这些国家并不受《公约》约束。《公约》只对缔约国具有法律约束力。因而可以说,《公约》的生效对该地区的非缔约国不会产生任何的影响。

地缘政治和战略方面的需要并不是决定一个国家是否成为《公约》缔约国的依据,除非其他相关跨境水资源国也成为缔约国。好比当中国投反对票时,印度若批准实施该条约则不明智。

但是,《公约》的生效产生了一个显著的影响。它提高了国际习惯法在跨境水冲突中的地位,创造了一个新的参考点。作为联合国公约,它促进了跨境水资源合作中国际习惯法相关原则的编纂。《公约》为数据共享、谈判和争端解决提供了合法有效的实践,这些实践可能被写入双边或多边水资源共享协议。《公约》为跨境水资源谈判奠定了基础,并对现有碎片化和不对称的协议重新进行审议。

于晓刚——环保人士兼中国云南省(中国西南部省份)非政府组织(NGO)“绿色流域”主任

《公约》本着国际合作互利,睦邻友好,开发不应严重影响其他水道国应有利益和可持续原则,将成为国际水道良治的基础。随着缔约国的增加和相关国家良好实践案例的增加,《公约》将进一步完善和产生指引和约束效力。

迈克尔• 库格尔曼——伍德罗·威尔逊国际学者中心南亚东南亚高级项目合伙人

《公约》可能产生一定的积极影响,能够为跨境水资源的有效管理提供一个模板,或在某种程度上建立一个大致的标准模式。由于整个南亚地区河流沿岸国家(即河流共享国)之间高度不信任,我们不指望条约能够创造奇迹,促使各国在跨境河流流域问题上达成协议。因此,要真正能够达成协议,未来还有很长的路要走。

虽然许多南亚国家深陷跨境水资源争端,但它们并不准备实施《公约》提议的措施,尤其是相关规定有可能会损害某些国家利益。例如,《公约》规定,国家治理水域的方式不得对其他国家造成损害。实际上,这就意味着,如果某个上游国家大修河坝,导致下游的河流流量减少的行为可能会被视为违反《公约》规定。

欧洲国家与邻国之间的水资源问题相对不那么紧张,国家之间相互信任,因而达成协议问题不大。相反,巴基斯坦和印度,以及印度和孟加拉国之间在水资源方面互不信任,表明这些国家还没有为创造一个合作性水资源共享机制做好准备。

布沙拉·尼夏特——一位来自孟加拉国的“生物生态系统”(国际自然保护联盟的一项孟加拉国—印度倡议)项目经理

这将影响南亚处理水资源问题的方式。即使是非缔约国,在当今国际社会,国际话语权总会影响民间社会以及国家和地区研究群体的理解。从政府层面来说,当南亚国家进行谈判时,该《公约》不可避免地会对此产生影响。包括孟加拉国和巴基斯坦在内的下游国家将《公约》作为他们的论据。自然地,非缔约国将承受来自国际社会的压力去变成《公约》缔约国。

拉马斯瓦米R. 耶尔——印度政府水利部前任秘书兼新德里政策研究中心荣誉教授

虽然印度投票支持该公约,但是《公约》将不会产生重大的影响。《公约》只是一个以任何国家都不会反对的“公平共享”原则为基础的概括性条款。因此,针对具体的案例仍需要进行大量的谈判。一般来说,根据国际习惯法,河流利用国需要将其意图事先通知下游各国,并且还要提供相关信息,征询相关下游国家的意见,充分考虑他们的担忧,同时尽量避免对下游国家造成损害或伤害。不仅赫尔辛基规则的规定如此,联合国公约中的规定也是如此。实际上,早在赫尔辛基规则出台之前,印度和巴基斯坦曾于1960年签署过《印度河水域条约》,这些原则构成了该条约的基础。

中外对话:为什么还有那么多国家没有签署这一公约?它们是否应该重新审视一下自己的立场?

迈克尔• 库格尔曼——伍德罗·威尔逊国际学者中心南亚东南亚高级项目合伙人

从理想层面来讲,南亚国家和中国应改变立场,支持《公约》。正如我们从该地区少数取得成功的跨界水资源协定(如《印度河河水条约》)中所看到的那样,有效的水资源管理机制可防止水域冲突的发生,并在某种程度上有助于保障水资源安全。但从实际层面来讲,我们不能期望这些国家很快就会改变自己的立场。这些国家间充满了不信任,尤其是在河流共享国之间,如巴基斯坦和印度,印度和孟加拉国,以及印度和中国。认为这些国家能够足够信任彼此,共同签署公约,呼吁在水资源管理方面大力合作并保持透明度实在是太天真了。

陈辉萍——厦门大学法学院国际水法研究小组成员

中国对公约投以反对票,主要有几个考虑:一是公约未充分考虑和反映上游国的利益,如公平合理利用原则所列的考虑因素不全面,不造成重大损害的义务使上游国比下游国承担更重的义务(这从批准公约的国家主要为下游国及无国际水道的国家可见一斑)。二是公约要求一国将“计划采取的措施”通知他国并进行协商和谈判,这有可能损害一国国家主权。三是公约规定的争端解决机制中,包括强制的实况调查委员会介入调查,这有可能损害一国主权,也有违中国一贯坚持的无第三方介入争端解决的立场。

于晓刚­——中国云南省(中国西南部省份)非政府组织()“绿色流域”主任

个人看法,中国在近十多年一直在国内进行国际水道上的水电开发,加入公约后,无所顾忌的开发行为将受一定的制约。中国对国际水道里水的利用主要是高附加值的水电,而公约强调各种利用之间平等,各种利用发生冲突时,应让位于维持生命所必需的人口的需要,与中国市场竞争观念不符。

拒绝签署公约不符合中国“第二大经济体”的国际形象,失去道德制高点。不参加就可不受公约和国际法制约的想法也不现实,最终也难躲避应有责任。而积极缔约可以借此改善邻国关系进而获得更多其他领域合作机会。作为缔约国还可引领公约的修订。在与公约精神不悖的情况下,公约给制定各项具体水道协定,留有利益博弈空间,中国仍然长袖可舞。

斯里尼瓦斯·乔克库拉——新德里政策研究中心国家间水问题研究员

尽管地缘政治因素能够促使一个国家决定批准该《公约》,但南亚国家和中国近期重新审视自己立场的希望不大。某些特定的背景因素使这些国家不会转变它们对该公约的态度。

第一,地理位置决定该地区各国的影响力存在差异。中国和印度等强大的国家不愿放弃他们的战略优势。第二,整体的重点仍在于跨界河流的发展和水资源分配。水污染防治与水资源短缺管理依然不是主要问题。这些国家倾向于采取更好的集体行动,正莱茵河或多瑙河治理中所看到的那样。中国和印度刚刚进入转型阶段,政府开始采取措施清理主要河流。这也迫使他们在考虑发展权利的同时,也思考一下共同的负担和义务。这些问题可能会促使这些国家重新思考自己的立场。

另外,该公约似乎以深化经济一体化为前提,而南亚和中国还远未达到这一阶段。从缺乏能够促进有关跨界水资源义务的对话的有效平台或机构来看,这一点很明显。在欧洲,较高的地区经济一体化程度和相关的组织架构有助于实现跨界水资源合作。一旦经济一体化程度加深,南亚国家和中国将不得不重新审视自己的立场。|

沙夫卡特·卡卡赫尔——巴基斯坦前外交官和联合国前高级官员

巴基斯坦不愿加入该公约是因为对水道定义中也包括地下水持保留意见,因为实际情况下很难判定河流蓄水层的地理分布。

巴基斯坦也对争端解决程序中缺少约束机制感到不满。相比于《印度河河水条约》中明文规定约束机制,该争端解决程序在这方面要差很多。

目前巴基斯坦和发展中国家应积极参与针对进一步完善国际水法所进行的讨论,而不是反对该公约。

Sunday, August 26, 2018

अमरीकी राज्य फ़्लोरिडा में गोलीबारी, दो लोगों की मौत

अमरीका के फ़्लोरिडा राज्य में हुई गोलीबारी में अब तक दो लोगों के मारे जाने और 11 लोगों के घायल होने की ख़बर है.
घटना जेक्सन्विल शहर की है जहां जैक्सनविल लैंडिंग नाम के शॉपिंग, एंटरटेनमेंट और डाइनिंग कॉम्पलेक्स में मास शूटिंग हुई.
जेक्सन्विल के शेरिफ़ के दफ़्तर ने कुछ समय पहले ट्विटर पर बताया था कि बहुत से लोग घायल भी हुए हैं और पुलिस ने लोगों से उस इलाके में न जाने की अपील की है.
शेरिफ़ का कहना है कि इस हमले को अंजाम देने वाला संदिग्ध गोरा व्यक्ति भी मारा गया है और फ़िलहाल किसी और की तलाश नहीं की जा रही है.
हमलावर की पहचान 24 साल के डेविड कट्ज़ नाम के व्यक्ति के रूप में हुई है जो बाल्टीमोर का निवासी था.
ख़बर है कि गोलीबारी एक एंटरटेनमेंट कॉम्पलेक्स के अंदर एक रेस्तरां में चल रहे वीडियो गेम टूर्नामेंट के दौरान हुई.
इस टूर्नामेंट के लाइव वीडियो में कई बार गोली चलने की आवाज़ें सुनी जा सकती हैं.
इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे प्रतिभागी घटना के वक्त अमरीकी फुटबाल गेम मेडन खेल रहे थे.
लॉस ऐंजिलिस टाइम्स के मुताबिक एक गेमर ने हारने के बाद गोलियां चलाई और फिर ख़ुद को भी मार डाला. इस रिपोर्ट में एक अन्य गेमर के बयान के हवाले से यह बात लिखी गई है.
स्थानीय पुलिस ने इस घटना से जुड़े इस पहलू की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है कि गोली चलाने वाले व्यक्ति ने टूर्नामेंट में हारने के बाद गोलियां चलाना शुरू की.
फ़्लोरिडा में इससे पहले साल 2016 में पल्स नाइटक्लब शूटिंग की घटना सामने आई थी जिसमें 49 लोग मारे गए थे. इसके साथ ही इस साल फरवरी में पार्कलैंड स्थित एक स्कूल में गोलीबारी में 17 लोगों की मौत हुई थी.
19 साल के द्रिनी जोका भी इस टूर्नामेंट में खेल रहे थे. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि ये उनकी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन था.
उन्होंने ट्वीट किया, "मैं बहुत खुशकिस्मत हूं. गोली मेरे अंगूठे में ही लगी."
शेरिफ़ दफ़्तर ने बताया है कि स्वैट टीम घटनास्थल पर मौजूद है और छानबीन कर रही है.
पुलिस ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि अब भी कई लोग घटनास्थल पर छिपे हुए हैं. उन्हें निकालने की कोशिश जारी है.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ इस घटना में चार लोग मारे गए हैं और 11 ज़ख़्मी हुए हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ जैक्सनवील के यूएफ़ हेल्थ हॉस्पिटल में छह लोग लाए गए हैं. इनमें से पांच की हालत स्थिर है जबकि एक की स्थिति गंभीर है.
ज़्यादा जानकारी मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

Friday, August 17, 2018

केरल: बाढ़ से 67 लोगों की मौत, राहत शिविरों में पहुँचे एक लाख लोग

केरल को 'ईश्वर का अपना देश' भी कहा जाता है. लेकिन इस राज्य को 94 साल की 'सबसे बड़ी बाढ़' का सामना करना पड़ रहा है.
केरल के कई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो गई है.
पिछले दो हफ़्तों में केरल के 14 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ की वजह से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर अब 67 हो गई है.
सरकारी अधिकारियों ने बुधवार शाम को बताया कि 15 अगस्त के दिन बाढ़ की वजह से 25 लोगों की मौत हुई.
बाढ़ से प्रभावित सभी ज़िलों में राहत शिविर लगाए गए हैं. बताया गया है कि एक लाख से अधिक लोग घरबार छोड़कर इन राहत शिविरों में रह रहे हैं.
राज्य के विभिन्न हिस्सों में विद्युत आपूर्ति, संचार प्रणाली और पेयजल आपूर्ति बाधित है.
यहाँ ट्रेन सेवाएं बाधित हैं और सड़क परिवहन सेवाएं भी अस्त-व्यस्त हैं. जगह-जगह सड़कें पानी में डूब गई हैं.
अधिकारियों के अनुसार, कासरगोड़ को छोड़कर बाकी सभी ज़िलों में शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी की घोषणा कर दी गई है. कॉलेजों और महाविद्यालयों ने परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं.
पलक्कड, वायनाड और कोच्चि कुछ ऐसे ज़िले हैं जिन्होंने कभी ऐसी आपदा का सामना नहीं किया.
कोच्चि में बचाव दल के एक कर्मचारी ने बीबीसी को बताया कि शहर में काफ़ी पानी घुस गया है. लोग कमर तक पानी में डूबे हैं, लेकिन वो अपने घर, अपनी जगह छोड़कर शिविर में जाने को तैयार नहीं हैं.
जोन्स नाम के एक बचावकर्मी ने बताया, "कोच्चि के जिस मोहल्ले में हम गए थे, वहाँ बच्चों समेत क़रीब 200 लोग फंसे हुए हैं. वो परेशानी में हैं. दुखी हैं. लेकिन अपनी संपत्ति छोड़ने से इनकार कर रहे हैं."
कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर में पानी घुस जाने के कारण उसे शनिवार तक बंद करने की घोषणा की गई है.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया है और राज्य में बाढ़ के हालात पर उनसे विस्तार से चर्चा हुई है.
विजयन ने मंगलवार को इस साल के ओणम उत्सव को रद्द करने की घोषणा कर दी थी. ये उत्सव राज्यभर में मनाए जानेवाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है.
लेकिन केरल सरकार ने राज्यभर में सांस्कृतिक समारोह आयोजित करने के लिए दी जानेवाली 30 करोड़ रुपये की राशि को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में दिए जाने का फ़ैसला किया है.
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों से बाढ़ राहत कोष में मदद करने का आग्रह भी किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्विटर पर एक बयान जारी कर लोगों से मदद मांगी है.
केरल सरकार ने राज्य के सभी छोटे-बड़े 27 बाँध खोल दिए हैं. इस वजह से रबर, चाय और ताड़ के खेतों में पानी भर गया है.
इडुक्की ज़िले में 65 वर्षीय किसान विक्रमण का कहना है कि पानी इतना ज़्यादा है कि उन्हें अपने खेतों की पहचान करने में भी मुश्किल हो रही है.
उन्होंने बताया, "हम नहीं जानते कि हमारी ज़मीन कहाँ है. पूरे इलाक़े में इतना पानी है कि खेतों की पहचान नहीं हो पा रही. इस साल की हमारी पूरी उपज बर्बाद हो जाएगी."
सड़कें डूबने की वजह से राज्य में खाने-पीने के सामान की सप्लाई भी बाधित हो गई है. सुंदरम नाम के एक व्यापारी ने बताया कि उनका काम ठप हो गया है. उन्होंने बताया कि इडुक्की ज़िले में बांध के क़रीब स्थित पूरा बाज़ार पानी में डूब गया है.

Friday, August 10, 2018

सूर्य ग्रहण 2018: राहु और केतु के कारण होता है ग्रहण, जानें इसकी 10 मान्यताएं

सावन महीने की शनिवारी अमास्या यानी कल 11 अगस्त 2018 को इस साल का आखिरी ग्रहण पड़ेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा जिससे इसका यहां कोई खास असर नहीं होगा। टाइम एंड डेट डॉट कॉम वेबसाइट के मुताबिक यह भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण शनिवार को दोपहर 01:32:08 बजे शुरू होगा। दोपहर करीब 03:16:24 मिनट पर ग्रहण का मध्य यानी अधिकतम ग्रहण होगा और शाम 5 बजे यह समाप्त हो जाएगा। इस बार सूर्य ग्रहण 3 घंटे 30 मिनट तक होगा।
जानें ग्रहण से जुड़ी 10 मान्यताएं-
1- मान्यता है कि राहु और केतु नाम का दानव सूर्य और चंद्रमा का दुश्मन है। जब राहु सूर्य को ग्रस लेता है तो सूर्य ग्रहण पड़ता है और जब चंद्रमा को ग्रसता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है।
2- कहा जाता है कि राहु और केतु नाम के दानव कोई आकार या अस्तित्व नहीं है। यह एक छाया ग्रह है। सूर्य और चंद्रमा से राहु की दुश्मनी तब से है जब भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान छल से अमृत पी रहे राक्षस का सिर सुदर्शन से काट दिया था। सिर वाले भाग को राहु और धड़ को केतु नाम से जानते हैं। राहु और केतु के छल को सूर्य और चंद्रमा ने देख लिया था और उन्होंने ही भगवान विष्णु को जानकारी दी थी।
3- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा न करने वाले पर बुरा असर होता है।
4- ग्रहण को नंगी आंख से नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।
5- मंदिर या पूजा घर को बंद कर देना चाहिए। ग्रहण के दौरा पूजा नहीं करना चाहिए।
6- ग्रहण के बाद स्नान करके और देवताओं को गंगाजल से पवित्र करके उनकी पूजा करना चाहिए।
7- ग्रहण के वक्त किसी को खाना नहीं खाना चाहिए और न ही पति पत्नी को एक साथ सोना चाहिए।
8- मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सिलाई-बुनाई करना या चाकू, छुरी जैसी धारदार चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
9- मान्यता है कि ग्रहण के दौरान भगवान का नाम लेने या भगवान का ध्यान करने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं करना चाहिए।
सावन महीने की शनिवारी अमास्या यानी कल 11 अगस्त 2018 को इस साल का आखिरी ग्रहण पड़ेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा जिससे इसका यहां कोई खास असर नहीं होगा। टाइम एंड डेट डॉट कॉम वेबसाइट के मुताबिक यह भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण शनिवार को दोपहर 01:32:08 बजे शुरू होगा। दोपहर करीब 03:16:24 मिनट पर ग्रहण का मध्य यानी अधिकतम ग्रहण होगा और शाम 5 बजे यह समाप्त हो जाएगा। इस बार सूर्य ग्रहण 3 घंटे 30 मिनट तक होगा।
10- ग्रहण के वक्त पवित्र नदियों जलाशयों में स्नान करने से बहुत ही पुण्य होता है। लेकिन स्नान करने के दौरान कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के दौरान गाय को चारा खिलाना या पशु पक्षियों को दाना डालना भी बहुत पुण्य मिलता है।

Tuesday, July 24, 2018

भारत-पाक: जहां गोलियां नहीं, रुपया बरसता है

भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी, सलामाबाद ट्रेड सेंटर में इम्तियाज़ कई दूसरे मज़दूरों के साथ पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर सेआने वाले ट्रकों का इंतज़ार कर रहे हैं.
भारत-पाकिस्तान की तरफ़ से शुरू किए गए इस ट्रेड सेंटर पर 35 साल के इम्तियाज़ पिछले छह साल से मज़दूरी कर रहे हैं.वे उन दिनों स्कूल में पढ़ते थे जब भारत-पाकिस्तान ने एलओसी ट्रेड शुरू किया था. उनका घरबार इसी से चलता है.
उनसे बात हो ही रही थी कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से एक रंगीला और ख़ूबसूरत ट्रक सलामाबाद के ट्रेड सेंटर पर आ पहुंचा जिसमें बादाम लदा हुआ था.भारत-किस्तान व्यापारम्तियाज़ कहते हैं, "दस साल पहले शुरू किए गए एलओसी ट्रेड ने उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को थोड़ा बहुत ज़रूर बदल दिया है. पढ़े-लिखे नौजवानों को इस कारोबार से काफी फायदा मिला है. यहां जो बेरोज़गार थे, कम से कम उनको तो रोज़गार मिला है."
उन्होंने कहा, ''पहले यहां कम काम मिलता था लेकिन व्यापार शुरू होने से चीज़ें काफी बदली हैं. सरकार को चाहिए कि इस कारोबार को बढ़ावा दिया जाए. अगर ऐसा होगा तो काफी लोगों को रोज़गार मिलेगा."भारत-पाकिस्तान ने साल 2008 में सीबीएम (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स यानी भरोसा बहाल करने के लिए उठाए जाने वाले कदम) के तहत सीमा के आरपार से यहां ट्रेड शुरू किया था.इसी तरह भारत प्रशसित कश्मीर से केले, अनार, अंगूर, मसाले, कढ़ाई की हुई चीज़ें, शॉल, कश्मीरी आर्ट के दूसरे आइटम और मेडिसिन हर्ब्स शामिल हैं.
भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी, सलामाबाद से मुज़फ़्फ़राबाद जाने वाले रास्ते पर हफ्ते में चार दिन पाकिस्तान के लिए माल से लदे ट्रक रवाना होते हैं.इसी तरह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के चकोटी से भी ट्रक इस तरफ़ आते हैं. सलेमाबाद से चकोटी की दूरी 16 किलोमीटर है.झेलम नदी की बाई तरफ़ आबाद उड़ी, बारामूला ज़िले की एक तहसील है. इसी तरह जम्मू के पुंछ के चका दी बाग से रावलाकोट के लिए भी हर हफ़्ते ट्रेड होता है.
दस साल के इस ट्रेड में अब तक 5200 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है.उड़ी के सब-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बशीर-उल हक़ चौधरी कहते हैं, "अभी तक हमने 5200 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. इसमें जो एक्सपोर्ट है, वह 2800 करोड़ रुपये का है जबकि इम्पोर्ट करोड़ रुपये का है."
सीमा पार से होने वाले इस व्यापार से जुड़े कारोबारी काफ़ी खुश हैं लेकिन उनका कहना है कि इसमें अब भी कुछ कमियां हैं जिन्हें पूरा करना बहुत ज़रूरी है.हिलाल तुर्की भारत प्रशासित कश्मीर में एलओसी ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं.
वह कहते हैं, "दोनों देशों के रिश्ते नाज़ुक हैं लेकिन इसके बावजूद दोनों तरफ से ये ट्रेड चल रहा है. इसके साथ-साथ अभी कई मुश्किलें हैं जिससे इस कारोबार में अड़चनें आ रही हैं. सबसे पहले तो इसमें केवल 21 चीज़ों का ही व्यापार किया जा सकता है. सामान का आवागमन तो होता है पर बैंकिंग की सुविधा नहीं है."

उन्होंने बताया, ''यहां के हालात थोड़े अलग हैं. अगर आपने यहां से कोई सामान भेजा तो वहां से आपको कोई चीज़ मंगानी होगी. कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि जब हम उस पार से हम कोई आइटम लाते हैं, यहां उसकी मार्केट वैल्यू उसकी खरीद कीमत से कम होती है, ऐसे में ये धंधा नुक़सान का हो जाता है और कई कारोबारी इस वजह से बिज़नेस से अलग हो गए.''