Wednesday, October 30, 2019

जस्टिस बोबडे बोले, कुछ के पास बोलने की ज़्यादा आज़ादी है -प्रेस रिव्यू

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का इंटरव्यू प्रकाशित किया है.
इंटरव्यू में जस्टिस बोबडे ने कहा है कि भारत में कुछ लोगों के पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत ज़्यादा है और कुछ के पास बहुत कम.
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी की बहस के दो पहलू हैं.
जस्टिस बोबडे ने कहा, ''इस बहस का एक वो पहलू है जहां कुछ लोग सार्वजनिक और सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म्स पर कुछ भी कहकर निकल जाते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. दूसरा पहलू ये है कि कुछ लोगों को अपनी बात रखने के लिए प्रताड़ित किया जाता है.''
संवैधानिक अदालतों में महिला जजों की कम संख्या के बारे में पूछने पर जस्टिस बोबडे ने कहा, ''मैं पूरी कोशिश करूंगा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों को चुनने में निष्पक्ष रवैया अपनाया जाए लेकिन दिक़्कत है महिला जजों की उपलब्धता. हाई कोर्ट में जज बनने के लिए के लिए कम से कम 45 वर्ष उम्र होनी चाहिए. हम रातोरात महिला जजों की संख्या नहीं बढ़ा सकते. इसके लिए एक तय प्रक्रिया अपनानी होगी.''
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने कहा है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने में देरी की.
रिपोर्ट के मुताबिक़ संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त रुपर्ट कॉलविल ने कहा है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर में लगी पाबंदियों, आने-जाने की आज़ादी और मीडिया रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदियों जैसे मामलों की सुनवाई करने में तेज़ी नहीं दिखाई.
संयुक्त राष्ट्र ने केंद्र की मोदी सरकार से कश्मीरियों के मूलभूत अधिकारियों पर लगी पाबंदियों को जल्द से जल्द और पूरी तरह हटाने को कहा है.
नवभारत टाइम्स में ख़बर है कि दुनिया के टॉप-10 सीईओ में तीन भारतीय मूल के सीईओ शामिल हैं.
हार्वर्ड बिज़नस रिव्यू की तैयार की गई इस लिस्ट की में भारतीय मूल के सत्या नडेला, शांतनु नारायण और अजय बंगा ने शीर्ष 10 में जगह बनाई है.
अडोबी (Adobe) के सीईओ शांतनु नारायण इसमें छठे नंबर हैं. मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बंगा सातवें और माइक्रोसॉफ़्ट के सीईओ सत्या नडेला नौवें नंबर पर हैं.
ऐमज़ॉन के सीईओ जेफ बेज़ॉस इस लिस्ट में 2014 से लगातार पहले नंबर पर रहते थे लेकिन इस बार वो लिस्ट में जगह भी नहीं बना पाए हैं.
नाइकी के सीईओ माइक पार्कर लिस्ट में 20वें और ऐपल के सीईओ टिम कुक लिस्ट में 60वें नंबर पर हैं.
इस लिस्ट में अलग-अलग कारोबारी क्षेत्रों से 100 सीईओ को शामिल किया है. लिस्ट में अमरीकी टेक्नॉलजी कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेनसेंग ख़्वांग पहले नंबर पर हैं.
कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या की ख़बर सभी अख़बारों में पहले पन्ने पर है.
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर में पिछले 15 दिनों में 11 लोगों की हत्या हो चुकी है और ये सभी लोग कश्मीर से बाहर के थे.
जनसत्ता ने इसी ख़बर को आधार बनाकर 'आतंक की चुनौती' शीर्षक से संपादकीय भी लिखा है.
अख़बार लिखता है कि कश्मीर से जिस तरह लगातार हिंसा की ख़बरें आ रही हैं वो चितांजनक है और वो कहीं न कहीं उन सरकारी दावों की पोल भी खोलती हैं जिनमें कहा जाता है कि हालात सामान्य हैं.
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिव सेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर जो संघर्ष चल रहा है उसे भी ज़्यादातर अख़बारों ने प्रमुखता से जगह दी है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि देवेंद्र फडणवीस शिवसेना के तल्ख़ रवैये के बावजूद गुरुवार या शुक्रवार को दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.
दैनिक भास्कर 'सत्ता पर जुबानी ग्रहण' हेडिंग से लिखता है कि महाराष्ट्र में नतीजे आने के 6 दिन बाद भी सरकार बनाने के फ़ॉर्मूले पर बीजेपी और शिवसेना में सहमति नहीं बन सकी है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है वो ही पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे क्योंकि बीजेपी ने 50-50 का वादा नहीं किया था.
फडणवीस ने ये भी कहा कि हमारे पास प्लान बी नहीं है और हम शिव सेना के साथ ही मिलकर सरकार बनाएंगे, शिव सेना की तार्किक मांगों को माना जाएगा.
उधर शिव सेना का नेता संजय राऊत का कहना है कि हमारे पास विकल्प है लेकिन हम 'गठबंधन तोड़ने का पाप' नहीं करना चाहते.

Tuesday, October 8, 2019

डोनल्ड ट्रंप ने दी तुर्की की अर्थव्यवस्था 'तबाह' कर देने की धमकी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उत्तरी सीरिया से अमरीकी फ़ौजों के हटने के बाद अगर तुर्की 'अपनी हदें पार करता है' तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह देंगे.
आशंका जताई जा रही है कि अगर अमरीकी सैनिक हटे तो तुर्की को सीमा के पास मौजूद कुर्द लड़ाकों के ख़िलाफ़ हमला बोलने का मौका मिल जाएगा.
कुर्द लड़ाके सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के प्रमुख सहयोगी रहे हैं. उधर तुर्की के रक्षा विभाग ने कहा है कि उत्तरी सीरिया में हमले के लिए वो पूरी तरह तैयार है.
ट्रंप ने कई ट्वीट करके अमरीकी सैनिकों को उत्तरी सीरिया से हटाने के अपने फ़ैसले का बचाव किया है.
मगर ट्रंप के रिपब्लिकन सहयोगी भी उनके फ़ैसले की तीखी आलोचना कर रहे हैं. डेमोक्रेटिक सदस्य नैंसी पेलोसी और रिपब्लिकन मिच मैकोनल ने इसे 'ख़तरनाक़' और 'उतावला' क़दम बताया है.
विदेश विभाग की प्रेस ब्रीफ़िंग में मौजूद रहे ब्लूमबर्ग न्यूज़ के संवाददाता निकोलस वेडम्स का कहना है कि विदेश विभाग ट्रंप के फ़ैसले पर लीपापोती कर रही है.
निकोलस वेडम्स ने कहा, "विदेश मंत्रालय के दो अधिकारियों ने स्पष्टीकरण दिया है कि वास्तव में अमरीका सिर्फ़ दो ठिकानों से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा था. इनका यह कहना दिखाता है कि वे दरअसल अपने इन सैनिकों को किसी संभावित नुक़सान से बचा रहे थे."
"अधिकारियों ने ये भी कहा कि वे नहीं चाहते थे कि अमरीकी सैनिक वहां मौजूद रहें और वे हमले के लिए मूक सहमति देते दिखें. यानी ये उसी तरह की स्थिति है जहां राष्ट्रपति कहते कुछ और हैं और फिर उसे समझा कुछ और जाता है. और बाद में अधिकारी आगे आकर कुछ और ही कहानी सामने रख देते हैं."
सीरिया में अमरीका के 1,000 सैनिक तैनात हैं और फ़िलहाल सीमा से क़रीब दो दर्जन सैनिकों को हटा लिया गया है.
मुख्य कुर्द समूह ने सैनिकों को हटाने के फ़ैसले को पीठ में छूरा घोंपना क़रार दिया है. कुर्दों का कहना है कि अमरीकियों ने उन्हें भरोसा दिया था कि वो इस इलाक़े में किसी भी तुर्की सैन्य अभियान को नहीं होने देंगे.
सीरियाई कुर्द लड़ाकों के संगठन वाईपीजी के राजनीतिक संगठन पीवाईडी के प्रवक्ता सालेह मुस्लिम ने कहा कि इस फ़ैसले का उल्टा असर पड़ेगा.
सालेह मुस्लिम कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को इस बारे में कुछ करना चाहिए. हम समझते हैं कि ये एक तरह से इस्लामिक स्टेट को फिर से संगठित होने का मौका देना है और ये बहुत ख़राब स्थिति है. हर किसी को इसके ख़िलाफ़ होना चाहिए. दाएश (आईएसआईएस) अभी ख़त्म नहीं हुआ है."
सालेह का कहना है कि तुर्की के किसी भी हमले का कुर्द लड़ाके और उनके सहयोगी मुक़ाबला करेंगे.
आलोचकों का कहना है कि अमरीकी सैनिकों के हटने से कुर्द लड़ाकों पर तुर्की का हमला हो सकता है और इस्लामिक स्टेट का फिर से उभार देखने को मिल सकता है.
कुर्द लड़ाकों को तुर्की चरमपंथी मानता है. लेकिन ट्रंप ने तुर्की को अपने फ़ैसले का फ़ायदा उठाने के प्रति चेतावनी दी है.
पेंटागन और विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सैनिक न हटाने की सलाह दी थी, फिर भी ट्रंप ने यह फ़ैसला ले लिया.