Tuesday, November 27, 2018

की जगह अब आईटीईपी कोर्स, फिलहाल बीएड-डीएलएड चलता रहेगा

सरकारी स्कूल में अध्यापक बनना चाहते हैं तो अब आपको बीएड या डीएलएड जैसे कोर्स करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई) ने दो नए कोर्स लॉन्च किए हैं। इंटीग्रेटड टीचर एजुकेशन प्रोगाम (आईटीईपी) कोर्स चार साल का होगा। एनसीटीई ने एक नोटिफिकेशन जारी कर सत्र 2019-23 के लिए आईटीईपी कोर्स संचालित करने के इच्छुक शिक्षण संस्थानों से ऑनलाइन आवेदन मंगाए हैं। संस्थान 3 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
अभी तक प्री प्राइमरी से प्राइमरी स्तर तक की कक्षाओं में पढ़ाने के लिए डीएलएड जरूरी था। वहीं, अपर प्राइमरी से सेकेंडरी स्तर तक केो स्कूलों में अध्यापन कार्य के लिए बीएड करना अनिवार्य था। लेकिन अब एनसीटीई चार वर्षीय इंटिग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम(आईटीईपी) शुरू करने जा रहा है। इसका मतलब यह है कि प्राइमरी या फिर अपर प्राइमरी और इंटरमीडिएट में पढ़ाने के लिए अभ्यर्थियों को अब बीटीसी, डीएसएड या फिर बीएड का कोर्स नहीं करना पड़ेगा।
अगर कैंडिडेट ने चार साल का इंटीग्रेटेड टीचर एजूकेशन प्रोग्राम पूरा कर लिया है तो उसके लिए टीईटी, एसटीईटी या स्टेट लेवल के अन्य टेस्ट क्लियर करके टीचर बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
एक आईटीईपी प्री प्राइमरी से प्राइमरी स्तर तक पढ़ाने के लिए होगा, जबकि दूसरा आईटीईपी कोर्स अपर प्राइमरी से सेकेंडरी स्तर तक पढ़ाने के लिए होगा। दोनों ही पाठ्यक्रमों की अवधि चार वर्ष की होगी और इनमें 12वीं के बाद दाखिला मिलेगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए ग्रेजुएशन की जरूरत नहीं होगी।
राज्य सरकार करेगी फैसला कि दाखिला एंट्रेंस टेस्ट से होगा या मेरिट के आधार पर
कोई भी कॉलेज, जिसमें बीएड के साथ एमएड या बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हों (कंपोजिट कॉलेज), वे आईटीईपी कोर्स संचालित करने की मान्यता ले सकते हैं। अभी तक डीएलएड की संबद्धता राज्य सरकार के शिक्षा विभाग और बीएड की संबद्धता संबंधित विश्वविद्यालय से मिलती थी लेकिन इन दोनों पाठ्यक्रमों की संबद्धता सीधे विश्वविद्यालय से मिलेगी और मान्यता एनसीटीई की रहेगी। कोर्स में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट या फिर मेरिट के आधार पर होगा, इस बात का फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी। .
प्रत्येक कॉलेज में मिलेंगी 50 सीटें
एनसीटीई की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक आईटीईपी के लिए एक यूनिट 50 सीटों की होगी। बीएड-एमएड वाले संस्थान को इस कोर्स के लिए 500 वर्ग मीटर भूमि और 400 वर्ग मीटर बिल्डिंग तैयार करनी होगी। किसी नए संस्थान को यह कोर्स संचालित करने के लिए बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे कोर्स के साथ यह कोर्स मिलेगा। इसके लिए उन्हें कम से कम 3000 वर्ग मीटर भूमि खरीदनी होगी। यह मानक केवल 50 सीटों के लिए है। एक कॉलेज इससे अधिक सीटें भी ले सकता है, जिसके हिसाब से भूमि और इमारत की सीमा बढ़ जाएगी।
फिलहाल बीएड-डीएलएड चलता रहेगा
एनसीटीई ने जो दो नए पाठ्यक्रम लांच किए हैं, उनकी संबद्धता सत्र 2019-20 से मिलेगी। लिहाजा, फिलहाल दो वर्षीय बीएड और एक वर्षीय डीएलएड कोर्स चलता रहेगा। अभी एनसीटीई ने इन्हें बंद करने की कोई घोषणा नहीं की है।

Wednesday, November 7, 2018

पीएम मोदी ने भारत-चीन सीमा के पास सैनिकों के साथ मनाई दिवाली

उत्तरकाशीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा के पास बर्फीले पहाड़ों पर सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के जवानों के साथ बुधवार को दिवाली मनाई. मोदी ने जवानों से कहा कि दूर-दराज के इलाकों में बर्फीले पहाड़ों पर ड्यूटी करने की उनकी लगन राष्ट्र की ताकत को और मजबूत बनाती है. हर्षिल छावनी क्षेत्र में जवानों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अपनी प्रतिबद्धता और अनुशासन के जरिये 125 करोड़ भारतीयों के सपने एवं भविष्य को सुरक्षित करते हैं और लोगों में सुरक्षा और निडरता का भाव पैदा करने में मदद करते हैं.
मोदी ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की मौजूदगी में सैनिकों से कहा, ‘‘आप हमारी जमीन के केवल एक कोने की रक्षा नहीं कर रहे हैं. देश की सरहदों की सुरक्षा करके, आप 125 करोड़ भारतीयों के सपनों और जिंदगियों की सुरक्षा कर रहे हैं.’’
जवानों और दिवाली के दौरान जलने वाले दीयों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया को रोशनी देने के लिये जिस तरह दीया स्वयं को जलाता है उसी तरह आप भी देश की सुरक्षा करने के लिये अपने जीवन का बलिदान देते हैं.’’ बलों के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने करियर की शुरुआत में सैनिकों के साथ समय बिताने का मौका मिला और वह उनकी जरूरतों को लेकर संवेदनशील हैं.उन्होंने पूर्व सैनिकों के लिए लंबे समय से अटके ‘वन रैंक, वन पेंशन’ लागू करने को रक्षाकर्मियों के साथ उनके लंबे जुड़ाव का नतीजा बताया.
मोदी ने कहा, ‘‘आरएसएस सदस्य के रूप में, मुझे सेना के जवानों के बीच रहने का मौका मिला. उस समय, मैंने ‘वन रैंक, वन रेंशन’ के बारे में बहुत सुना था. कई सरकारें आईं और चली गईं. चूंकि मैं आपसे जुड़ा रहा था, मैंने आपकी भावनाओं को समझा. इसलिए प्रधानमंत्री बनने के बाद, आपके सपने को पूरा करना मेरी जिम्मेदारी थी.’’ प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘भले ही इसे लागू करने के लिए 12 हजार करोड़ रुपये की बड़ी राशि की जरूरत थी, इसे पूरा किया गया. आज मैं खुश हूं कि 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक ‘वन रैंक, वन पेंशन’ के तहत खर्च हो चुके हैं.’’
उन्होंने आईटीबीपी के जवानों के साथ सालों पहले हुई बातचीत का भी जिक्र किया जब वह कैलाश मानसरोवर यात्रा का हिस्सा बने थे.मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत अच्छी प्रगति कर रहा है. मोदी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा मिशनों में दुनिया भर से प्रशंसा और सराहना हासिल की है. अपने संबोधन के बाद, प्रधानमंत्री ने जवानों को मिठाई बांटी. वह सीमावर्ती गांव बागोरी के लोगों से भी मिले और उन्होंने हर्षिल में गंगा की सहायक नदी भागीरथी के तट पर पूजा अर्चना की.
मोदी हर्षिल में करीब सवा घंटा रूके. यह एक छावनी इलाका है जो उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा के करीब 7,860 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने केदारनाथ जाकर पूजा अर्चना की और केदारपुरी में चल रही पुनर्निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. शीतकाल के लिये कपाट बंद होने से दो दिन पूर्व मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री ने वहां करीब दो घंटे बिताये. उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में करीब 10—15 मिनट गुजारे और इस दौरान भगवान शिव का रूद्राभिषेक किया. केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी टी गंगाधर लिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीर्थ पुरोहित प्रवीण तिवारी ने मंदिर में पूजा संपन्न करायी.
उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ मौजूद थे .गर्भगृह से बाहर आने के बाद मोदी ने मंदिर की परिक्रमा की और पिछले कुछ दिनों में धाम में हुई हिमपात से खूबसूरत दिखायी दे रहे नजारे का भी दीदार किया .प्रधानमंत्री ने मंदिर प्रांगण में लगायी गयी केदारनाथ की तस्वीरों का भी अवलोकन किया जिसमें वर्ष 2013 में आयी प्रलयंकारी भीषण आपदा से उजड गये केदारनाथ क्षेत्र के पुनर्निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया था .
केदारनाथ के समीप स्थित केदारपुरी ने 2013 की प्रलयकारी बाढ़ का दंश झेला था जिसमें हजारों लोग मारे गए थे.प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि मोदी ने पूरे मंदिर परिसर का दौरा किया जहां पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कार्य की प्रगति से अवगत कराया.मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग 'आस्था पथ' के दोनों ओर खडे़ श्रद्धालुओं तथा स्थानीय लोगों का भी प्रधानमंत्री ने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया और उन्हें दिवाली की शुभकामनायें भी दीं .
प्रधानमंत्री इससे पहले अक्टूबर 2017 में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से ठीक पहले भगवान के दर्शन के लिए आए थे.वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने दिवाली सियाचिन में जवानों के साथ मनाई थी.वर्ष 2015 में वह दिवाली पर पंजाब सीमा पर गये थे. इसके अगले वर्ष मोदी हिमाचल प्रदेश गये थे जहां उन्होंने आईटीबीपी पुलिस के जवानों के साथ एक सुरक्षा चौकी पर सम बिताया था.मोदी ने पिछले साल प्रधानमंत्री के रूप में अपनी चौथी दिवाली जम्मू कश्मीर के गुरेज में सैनिकों के साथ मनाई थी.