Sunday, May 26, 2019

लोकसभा चुनाव 2019: वो हाईप्रोफ़ाइल सीटें जिनके नतीजों का था इंतजार

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लोकसभा चुनाव 2019 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 303 सीटों पर रिकॉर्ड जीत हासिल की है.
इस चुनाव में जहां बीजेपी ने 2014 की ही तरह कई राज्यों में सभी सीटों पर जीत हासिल की है वहीं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन भी किया.
11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में लोकसभा की 542 सीटों के लिए हुए चुनाव में उतरे कुल 8,040 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला हो गया है तो देखते हैं कि कौन-कौन से कद्दावर चेहरे यह चुनाव हार गये और वो कौन-कौन से बड़े नाम थे जिन्हें जनता ने अपना प्रतिनिधि चुना.
बात करते हैं उन बहुचर्चित उम्मीदवारों और वैसी हाईप्रोफ़ाइल सीटों का हाल, जिन पर सबकी नज़रें थीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से 4,79,505 वोटों से जीते. उन्हें 6 लाख 75 हज़ार से भी अधिक वोट मिले. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने यहां अरविंद केजरीवाल को 3,71,784 वोटों से हराया था. यहां से मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय की जमानत ज़ब्त हो गई. उन्हें महज 1 लाख 53 हज़ार वोट मिले.
जब कोई प्रत्याशी अपने चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वोटों का छठा हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त मानी जाती है और नामांकन के दौरान दी गई उनकी राशि ज़ब्त हो जाती है.
2019 के चुनाव में वाराणसी में क़रीब 10 लाख 60 हज़ार वोट पड़े.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे और 5 लाख 55 हज़ार से अधिक वोटों से जीत हासिल की.
गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी को लगभग 3 लाख 35 हज़ार वोट मिले तो अमित शाह को लगभग 9 लाख वोट. अन्य सभी 16 प्रत्याशियों की जमानत ज़ब्त हो गई.
इस सीट से जीत कर लाल कृष्ण आडवाणी जैसे बीजेपी के कद्दावर नेता संसद पहुंच चुके हैं.
चुनाव के दौरान इस बात की चर्चा थी कि बीजेपी की पारंपरिक सीट पर क्या अमित शाह रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करेंगे और चुनाव परिणाम में उन्होंने यहां न केवल अब तक के सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की बल्कि अब तक सबसे अधिक वोट हासिल करने वाले नेता भी साबित हुए.
2014 के चुनाव में लाल कृष्ण आडवाणी को यहां 7,73,539 वोट मिले थे.
लोकसभा चुनाव 2019 में जिस एक सीट से बीजेपी की जीत को सबसे बड़ा माना जा रहा है वह अमेठी है.
अमेठी कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ है और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहीं से चुनकर बीते तीन बार से लोकसभा में जाते रहे हैं. यह लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को मिली पहली जीत भी है.
स्मृति इससे पहले 2014 में भी अमेठी से ही चुनाव मैदान में उतरी थीं लेकिन तब राहुल गांधी ने उन्हें 1,07,903 वोटों से हराया था.
हालांकि, स्मृति ईरानी केंद्र में मंत्री बनाई गईं और साथ ही अमेठी कड़ी मेहनत में जुटी रहीं.
23 मई को राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के नतीजे घोषित किये जाने से पहले ही अमेठी से हार मानते हुए स्मृति ईरानी को जीत की बधाई दे दी और साथ ही ये भी कहा कि वो वहां की जनता का ख्याल रखें और उनकी अपेक्षा पर खरी उतरें.
कांग्रेस अध्यक्ष भले ही अमेठी के अपने पारिवारिक गढ़ को गंवा बैठे हों. वो केरल की वायनाड सीट से 431,770 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की.
राहुल गांधी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पीपी सुनीर को पराजित किया जिन्हें 274,597 वोट मिले, जबकि राहुल गांधी को 7,06,367 वोट हासिल हुए.
केरल में यह किसी भी प्रत्याशी की सबसे बड़ी जीत है. पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने भारी जीत पर प्रसन्नता व्यक्त की. सबसे पहले उन्होंने ही राहुल गांधी की उम्मीदवारी की घोषणा की थी.
चांडी ने कहा, "इस परिणाम की उम्मीद पहले से थी, क्योंकि जिस दिन उनके नाम की घोषणा हुई थी, वायनाड के लोगों ने उन्हें स्वीकार कर लिया था. इस क्षेत्र में जब भी उनका दौरा हुआ. पहली बार जब वह नामांकन भरने आए और उसके बाद एक दिन के प्रचार के लिए आए, कांग्रेस का हर कार्यकर्ता वाकई उत्साहित था. उनकी उपस्थिति के कारण सभी उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ा और यही कारण है कि हम केरल में इस तरह की भारी जीत हासिल कर सके."
लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बिहार की बेगूसराय सीट सबसे हॉट सीटों में से एक थी. यह सीट देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के यहां से चुनावी मैदान में उतरने की वजह से सुर्खियों में रही.
इस सीट पर बीजेपी ने भी अपने कद्दावर नेता गिरिराज सिंह को उतार कर मुक़ाबला बेहद रोमांचक बना दिया था.
हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान यहां इन दोनों के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही थी लेकिन जब नतीजे आये तो कन्हैया कुमार यहां गिरिराज सिंह से लगभग 4 लाख 20 हज़ार वोटों से हार गये.
कन्हैया को क़रीब 2 लाख 68 हज़ार वोट ही मिले. वहीं तीसरे स्थान पर रहे आरजेडी के मोहम्मद तनवीर हसन को क़रीब दो लाख वोट मिले.
बीते साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में मिली जीत के पीछे रहे चेहरों में से एक ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना सीट से 1,25,549 वोटों से चुनाव हार गए.
माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य के लिए यह दोहरी हार है, क्योंकि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे, जहां पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया है.
बीजेपी ने 2014 की ही तरह दिल्ली की सभी सात सीटों पर जीत का परचम लहराया है. यहां चुनाव के दौरान सबसे चर्चित सीटों में से एक थी पूर्वी दिल्ली.
इस सीट से क्रिकेट के मैदान से संन्यास लेकर लोकसभा चुनाव में पहली बार उतरे क्रिकेटर गौतम गंभीर चुनावी मैदान में थे और उन्होंने जीत का परचम लहराते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली को 3.91 लाख मतों से हराया है.
चुनाव प्रचार के दौरान यह सीट गौतम गंभीर और आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मार्लेना के कारण लगातार चर्चाओं में बनी हुई थीं.
मार्लेना ने बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर पर गंभीर आरोप लगाए थे.
आतिशी ने गौतम गंभीर के ख़िलाफ़ ऐसे पर्चे बांटने का आरोप लगाया था जिसमें उनके (आतिशी के) लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था.
इस पर गंभीर ने कहा था कि यदि वो यह साबित कर देती हैं तो जीतने के बावजूद वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे.

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